।।नित्यप्रेरणा ।।
एक दिन-एक पृष्ठ -एक विचार
श्री गुरूजी (श्री माधव सदाशिव राव गोलवलकर )के विचारों पर आधारित श्री गुरूजी समग्र के १२ खंडों का संक्षिप्त रूप।
१ जनवरी
यह है् हमारी पवित्र मातृभूमि भारत माता .जिसी महत्ता के गीत देवताओं ने इन शब्दों मै गाये हैं .
गायंति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारत भूमिभागे ।
स्वर्गापवर्गास्पदहेतुभूते भवन्ति भूयः पुरूषाः सुरत्वात्।।
(देवगण इस प्रकार गीत गाते हैं कि हम देवताओं से भी वे लोग धन्य हैं. जो स्वर्ग अपवर्ग के लिए साधनभूत् भारत भूमि में उत्पन्न हुए हैं।
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यह भूमि ,जिसे महायोगी अरविंद ने विश्व की दिव्य जननी के रूप में जीवंत आविष्कीकरण कर प्रत्यक्ष किया जगन्माता ।आदिशक्ति । महामाया। महादुर्गेा । और जिसने मूर्तरूप साकार होकर उसके दर्शन पूजन का हमें अवसर प्रदान किया है।
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भूमि , जिसकी स्तुति हमारे दार्शनिक कवि रविंद्रनाथ ठाकुर ने देवी भूवनमोहिनी नील सिंधु जल धौत चरण तल कहकर की है।
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यह भूमि जिसका वंदन स्वतंत्रता के उद्घोषक कवि बंकिम चंद्र ने अपने अमर गीत वंदे मातरम् में किया है। जिसने सहस्त्रों युवा हृदयों को स्फूर्त कर स्वतंत्रता की प्राप्ति हेतु आनंदपूर्वक फांसी के तख्ते पर चढने की प्रेरणा दी-त्वं हि दुर्गा दशप्रहरण धारिणी।
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यह भूमि । जिसकी पूजा हमारे सभी संत महात्माओं ने मातृभूमि ,धर्म भूमि , कर्म भूमि एवं पुण्य भूमि के रूप में की है। यह वास्तव मे देव-भूमि और मोक्ष भूमि है।
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यह भूमि , जो अनंत काल से हमारी प्यारी पावन भारत माता है, जिसका नाम मात्र हमारे हृदयों को शुध्द सात्विक भक्ति की लहरों से आपूर्ण कर देता है।
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यह भूमि जो अनंत काल से हमारी प्यारी भारत माता है, जिसका नाम मात्र हमारे हृदयों को शुद्ध ,सात्विक भक्ति की लहरों से आपूर्ण कर देता है।
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अहो ,यही तो हमारी सबकी मां है, हमारी तेजस्विनी मातृभूमि ।
वास्तव मे भारत नाम ही निर्देश करता है कि यह हमारी मां है। हमारी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार किसी महिला को पुकारने की सम्मान पूर्ण रीति यह है कि उसे उसके पुत्र के नाम से पुकारा जाये । किसी महिला को अमुक की पत्नी अथवा अमुक की मिसेज कहकर पुकारना पाश्चात्य रीति है। हम कहा करते हैं वह रामू की मां है। यही बात हमरी मातृभूमि भारत के नाम के विषय में भी यही लागू होती है । भरत हमारे ज्येष्ठ भ्राता हैं जिनका जन्म बहुत काल पूर्व हुआ था । वह उदार, श्रेष्ठ गुण संपन्न और विजयिष्णु राजा थे एवं हिंदु आदर्श के भासमान आदर्श थे । जब किसी स्त्री के एक से अधिक पुत्र होते हैं ,तब हम उसे उसकी ज्येष्ठ संतान के नाम से अथवा सबसे अधिक ख्याति प्राप्त संतान के नाम से पुकारते हैं । भरत ख्यातिप्राप्त थे, इसलिए यह भूमि उनकी माता कही गई? भारत ,अर्थात सभी हिंदुओं की माता ।
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मेरी मातृभूमि मंदिर है। संतों ,ऋषियों,मुनियों वाली ।
भारत भूमि मिहिर है। मेरी मातृभूमि मंदिर है
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