सोमवार, 1 नवम्बर 2010

कश्मीर की आवाज़…………a must read…..the real voice of kashmir

कश्मीर पर मीडिया क्या बता रहा है और क्या वास्तविकता है.....कश्मीर की अधिसंख्य जनता की.... 22 अक्टूबर 2010 को कश्मीर की आवाज गोष्ठी मैं आये विभिन्न वक्ताओं के विचार तो यही कहते हैं.नई दिल्ली के मावलंकर ऑडिटोरियम में आयोजत (कश्मीर की आवाज) विचार गोष्ठी मे बोलते हुएजम्मू-कश्मीर की पूर्व राज्यपाल श्री जगमोहन ने आयोजकों को बधाई दी तथा कहा कि भारत माता पर फूल चढ़ाने वाले एवं कश्मीर की सच्ची आवाज़ को निरुत्साहित किया जा रहा है। यहां आनेवाले लोग अपनी जान हथेली पर रखकर आए हैं। छद्म धर्मनिरपेक्ष मानव अधिकारवादी ढोंगी धर्म-निरपेक्ष और छद्म विकासवादी लोग कश्मीर का सच सामने नहीं आने देते। स्वायत्तता क्या है ?भारत का संविधान दुनिया का सबसे ‘लिबरल’ संविधान है जिसमें सभी के सारे अधिकार सुरक्षितकिए गए हैं। कश्मीर के बजट का 74 प्रतिशत हिस्सा केन्द्र सरकार द्वारा भेजा जाता है। गिलानीजैसे आतंक फैलाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।बलबीर पंजु - भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सदस्य एवं पत्रकार बलबीर पुंज ने कहा कि आज की सभा मे 7-18 देशों के प्रतिनिधि कश्मीर की असली आवाज़ सुनकर बाकियों को बतानेआए हैं। पाकिस्तानी कहते हैं कि कश्मीर के बिना पाकिस्तान अधूरा है हमारा कहना है कि पाकिस्तान के बिना हिन्दुस्तान अधूरा है। 63 साल से लगातार जुल्म चल रहा है। कश्मीर आज़ादरियासत थी, महाराजा हरिसिंह थे। उन्होने 22 अक्टूबर 1947 को मदद मांगी जिसके बाद 27अक्टूबर को हिदुस्तानी फौज वहां पहुची। नेहरू यदि इस मामले को यूएनओ  मैं नहीं ले जाते तो आज आज कश्मीर मे शांति होती कश्मीर को हिंदुस्तान से कोई  अलग नहीं कर सकता। आज यहांगूंजने वाली आवाजें संसद में भी गूंजेंगी।वी.के.गुप्ता - कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उत्तरांचल एवं झारखण्ड के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री वीके.गुप्ता ने कश्मीर से आए सभी का अभिनंदन किया और कहा कि में भी मीरपुर का रहने वाला हूँ.हमें शरणार्थी बनकर वहां से निकलना पड़ा, तब के जख्म आज भी वैसे ही हैं। 63 साल बाद भीकश्मीर समस्या का समाधान नहीं हुआ, समस्या और उलझती जा रही है। पता नहीं कौन सीकमजोरी है और कश्मीरी कब तक पिसते रहेंगे ? इसका समाधान जल्द निकलना चाहिए।कमर रब्बानी - गुज्जर युनाइटेड कौंसिल के अध्यक्ष श्री कमर रब्बानी ने कहा कि राज्यपाल रहतेहुए जगमोहन जी ने अच्छे काम किए। समस्या को बढ़ाने मे मीडिया की भी जिम्मेदारी है, पूरा जम्मू-कश्मीर भारत के खिलाफ नहीं है। गुज्जर-बक्करवाल आतंकवादी नहीं हैं तथा सभी कश्मीरी आतंकवादी नहीं हैं। नकारात्मक बातों को बढ़ाचढ़ाकर दिखाया जाता है। भारत के प्रधानमंत्री,गृहमंत्री तथा राज्य के मुख्यमंत्री गैर जिम्मेदार तथा गलतबयानी दिल्ली में बैठकर करते हैं। हमारासमुदाय हिन्दुस्तान जिंदाबाद करता है, हम पाकिस्तान के साथ मिलने वाले नहीं हैं। इस्लाम के नामपर ठेकेदारी बंद होनी चाहिए।इश्तियाक अहमद वानी - डोडा विचार मंच के अध्यक्ष श्री वानी ने स्वयं को भारत का बाशिंदा बताया। चांद सूरज पर घर बनाने की कल्पना हो रही है वह संभव हो सकता है लेकिन कश्मीर को भारत से अलग नहीं किया जा सकता। हम मजबूत भारत के साथ रहेंगे। जम्मू-कश्मीर का मौलवी मस्जिदों में बम लेके  रहता है। पूरी दुनिया मे  मुसलमान सबसे खुश हिन्दुस्तान है और सबसे शातं समुदाय हिन्दू है। अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़िया  मुख्यमत्रं बनी जिन्होने समस्या को बढ़ाया। पत्थर फैंकने के लिए चीन और पाकिस्तान से माल आ रहा है। मुल्क की खिदमत करके मुसलमान ‘कलाम’ बन सकते हैं।बशीर नाज़ - पत्रकार श्री नाज़ ने कहा कि आपने हमे सुनने के लिए दिल्ली बुलाया इसकी बहुतखुशी है। लेकिन और गिले-शिकवे हैं। भारत इसीलिए भारत हैं कि गिलानी दिल्ली में बोल सकताहै, बात कर सकता है। 1990 से लगातार लडा़ ई चलती आ रही है। महिलाआं े से जुल्म हुए हैं,मिलिटेंटों ने मुस्लिमों के भी घर जलाए हैं, कश्मीर में बहुत से यतीमखाने चल रहे हैं। भारत का नाम लेने वाले को वहां मारा जाता है। हमे फ़ख्र है कि हम हिन्दुस्तानी हैं और रहेंगे।श्रीमती खालिदा बेग़म - पाक अधिग्रहित क्षेत्र के शरणार्थियों की नेता श्रीमती खालिदा बेग़म ने कहा कि 63 सालों में पहली बार कश्मीरियों की आवाज़ सुनी जा रही है। 1990 से हम लगातार जुल्म सह रहे हैं। हमारे घरों को लूटा गया, बहने बेवा हुई, बच्चे चले गए, हमारी अस्मत लूटी गई आरै हम उजाड़े गए। दिल्ली से गया पैसा कहां गया ? आतंकवादियों के पास गया। कश्मीर से फौज को नहीं हटाना चाहिए। गरीबों को सिक्योरिटी दी जाए, अभी आतंकियों को सिक्योरिटी दी जा रही है,सभी कश्मीरी आतकं वादी नहीं हैं। गरीबी आरै बरेजगारी के कारण लागों को बहकाया और भड़काया गया है। अब्दुल्ला परिवार को परवाह नहीं है। गरीबों से बात नहीं होती। आज़ादी का लफ्ज कहां से आया ? किस बात की आजादी नहीं है ? मुज्जफ़राबाद वाले कश्मीरियों को आज़ादी चाहिए। हमारे बच्चे और नौजवान दर-दर की ठोकरें खाते हैं। केन्द्र एवं राज्य सरकार मदद नहीं करती।शिरिंग सेम्पल शमून ला  लद्दाख के पूर्व विधायक ने बोलते हुए कहा कि आज़ादी, स्वायत्तता की बातें कहां से आयीं ? ‘मिस रूल’ चल रहा है। 88-89 में मिलिटेंसी शुरु हुई। अधिकारियों ने खूबकमीशन खाया, नेशनल कांफ्रेंस के लिए काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई।डेमोक्रेटिक मिस रूल ऐसे हुआ। हुकूमत करते हुए स्वायत्तता की बात करना समाज को धोखा देनाऔर गुमराह करना है. पाकिस्तान मैं मिलकर क्या मिलने वाला है यह सभी को पता है। लद्दाखजम्मू-कश्मीर का 70 प्रतिशत हिस्सा है। लद्दाखी लोग उनके साथ नहीं हैं। खून-खराबा बंद होनाचाहिए। गिलानी के लोग बंदूक छोड़कर पत्थर पर आ गए। मुझे लगता है पदयात्रा पर आएंगे, औरभूख हड़ताल करेंगे तो और अच्छा होगा।श्री आरिफ मोहम्मद खान - पूर्व कैन्द्रीय मंत्री  ने कहा कि मैनै कश्मीरियों पर हुए जल्म की दास्तां दिल्ली मैं कुछ परिचित कश्मीरियों से सुनी है और उनकी दास्तां सुनकर मैं रो पड़ा। आतकंवादी समूह मैं आते है। पुलिसवाले देखते रहते हैं। पहले मुजाहिदों को खाना खिलाने के लिए कहा गया, बाद में अपनी एक बेटी की शादी मुजाहिद से करने को कहा गया। मैं मानता हूँ कश्मीरियों का दर्द  सच्चा है और उनके साथ बहुत ज्यादतियां हुई  हैं। जमीन पर जन्नत को जहन्नुम बना दिया गया है। पहले कश्मीरियत की बात होती थी आज आजादी की हो रही है। कश्मीरियतऔर आजादी को डिफाइन कौन करगा ? गिलानी करेंगे क्या ? या नुदं ऋषि करंगे  ? जो मानते थे हर चीज और हर जगह शिव मौजूद हैं, कबीर जैसी उनकी शख्सियत थी। उन्होंने असहनशीलताको उखाड़कर फंकै दिया। आज असनशीलता और नफरत सिखाई जा रही है.नुंद ऋषि के कारणही अधिकांश कश्मीरियों ने इस्लाम कबूल किया। वे मानते थे हिन्दू मुसलमान एक ही हैं उनमें कोई फर्क नही  है। मशहूर लेखक कल्हण द्वारा लिखित राजतरंगिणी में राजाओं एवं प्रभावशाली लोगों द्वारा की जाने वाली साजिशों का जिक्र आता है, जिसमें लिखा है कि शासन करने वाले लोग विद्रोह और बगावत बड़े मजे लेकर करते हैं, जिसकी कीमत आम आदमी को चुकानी पडत़ी है। कश्मीर मेंआज होने वाली साजिशें सरहद पार से भी रची जा रहीं हैं। मुझे समझ में नहीं आता कि उन्हें कैसी आजादी चाहिए। इसमें सरहद पार के साथ दिल्ली भी जिम्मेदार है। हमारे देश में गुजराल एवं मनमोहन सिंह दो शरणार्थी प्रधानमंत्री बन गए और यहां से पाकिस्तान जाने वाले मुसलमानो कोआज भी मुहाजिर माना जाता है और उन्हें मुहाजिर कौमी मूवमेंट पार्टी बनानी पड़ती है। हम किसभुलावे में हैं ? कश्मीर प्रॉब्लम इंडस्ट्री बन गई है जिसके लिए राजनीतिक वर्ग का निकम्मापनजिम्मेदार है। उमर फारुख की परवरिश किसने की है ? दिल्ली में बैठे लोगों को चंद खानदान दिखाई देते हैं और ये चिंहित परिवार निजी हितों को सामने रखकर राजनीति करते हैं।तेज सागर - जम्मू के पुरखू कैम्प मैं रहने वाले कश्मीरी पंडित श्री तेज सागर ने कहा कि कश्मीर में बड़े-बड़े मकानों में रहने वाले कश्मीरी पंडितों ने मकान, टैंट के साथ-साथ रेंट में रहने का हाल भी देख लिया है। लगभग 50 हजार परिवार बेघर है। सदियों से कश्मीरी रहे हम लोग आज अपने ही देश में माइग्रेंट कहलाते हैं यह बहुत दुख की बात है इसीलिए समस्या का समाधान जल्द निकलना चाहिए।श्रीमती नजमा हेपतुल्ला - राज्यसभा की पूर्व उपसभापति श्रीमती नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि 1986मैं मिलिटेंसी नहीं थी मैं कश्मीर की कांग्रेस महासचिव के नाते से प्रभारी थी। मैने वहा की गरीबीऔर बेरोजगारी देखी है माताओं बहनों की सिलाई और कढ़ाई करते करते आंखों की रोशनी चलीगई तब भी कश्मीरियो  ने बंदूक नहीं उठाई। कांग्रेस ने फारुख अब्दुल्ला के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, उससे गड़बड़ शुरु हुई और हालात बिगड़ने शुरु हुए। केन्द्र सरकार द्वारा भेजा गया पैसा कुछ लोगों की जेब मे जाता है आम कश्मीरी के लिए कुछ नहीं होता. मानती हूँ कि आम कश्मीरी दिल का सच्चा है और मेरी इच्छा है कि कश्मीरियों की आवाज देश के कोने-कोने में पहुंचे तथा समस्या का जल्दी समाधान हो।गुलाम अली - कश्मीर की समस्या को मल्टी डाइमेंशनल तरीके से देखना चाहिए। कश्मीर दुनियाकी सबसे बेहतरीन जमीन है जिसके आधे से ज्यादा भाग पर चीन और पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया है। यह राजनीतिक मामला है। जम्मू और लद्दाख का क्या होगा ? मुट्ठी भर लोगों का मामलाहै जो इस्लाम खतरे में है का नारा लगाते है. राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी का मामला है, पीओके. का मामला है। अभी केन्द्र से भेजा गया 100 करोड़ रुपया मुल्क के दुश्मनों के काम आने वालाहै।मोहम्मद खटाना - हम बक्करवाल गुज्जर ही है जिन्होंने 48 में कबाइलियों के आने की सूचना सेनाको दी, चीनी सेना के आने की सूचना दी, कारगिल युद्ध के समय सूचना दी। भेड़-बकरियां हमारा सोना है। हम हमेशा हिन्दुस्तानी रहेंगे। बेरोजगार नौजवानों की समास्या समाप्त होनी चाहिए।फारुख गांदरबली - कश्मीर एक कमजोर स्टेट है जहां सबकुछ दिल्ली से जाता है। बेरोजगारी का मसला है, समाज तालीम से महरूम है, व्यवसाय नहीं है, प्राइवेट इंडस्ट्री नहीं है। कश्मीर मै पहलीबार एन.डी.ए. सरकार के समय ‘फ्री एण्ड फेयर’ चुनाव हुए। गिलानी और मसर्रत आलम को किसने पैदा किया ? दिल्ली को मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवार ही दिखते हैं। शहीद कूका परे ने अपनी जानकुर्बान की, उनके साथियों को जेल भेजा गया एवं मुखबरी के नाम पर मारा गया। शासन मेंअलगाववादी एवं जमायत-ए-इस्लामी के लोग बैठे हुए हैं, सुविधाएं अलगाववादियों को  मिलती हैं।कश्मीर देश से दिन-प्रतिदिन दूर हो रहा है। हिन्दुस्तान जिन्दाबाद करने वालों का सामाजिक बहिष्कार होता है। सरकार यासीन मलिक के इशारे पर चलती है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को देश का गृहमंत्री, प्रधानमंत्री और काग्रेस डिफेडं कर रही है। बाप कुछ कहता है बेटा कुछ कहता है।अभी केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन वार्ताकारों को कौन जानता है ? पंडितों के बिना कश्मीर अधूराहै।
गुलाम मोहम्मद चौहान - पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को आजाद कराने का मसला है। कश्मीर देशका दिल है और दिल टूटना नहीं चाहिए।
शेख मोहम्मद सलीम - कश्मीरी पहाड़ियों के नेता श्री सलीम ने कहा कि राजोरी और पुंछ के कश्मीरी आजादी मांगने वालों के साथ नही  हैं। पहाड़ी लोग आजादी, स्वायत्तता, ‘सेल्फ रूल’ कोरिजेक्ट करते हैं। पहाड़ियों के साथ जम्मू-कश्मीर सरकार नें हमेशा नाइंसाफी की है। जिसके लिए दिल्ली वाले भी जिम्मेदार हैं। उमर अब्दुल्ला दिल्ली सरकार का रिश्तेदार है क्या ? इस पर मुकद्दमा दायर कर जेल में डालना चाहिए। पुंछ की 22 तहसील में पाक अधिकृत कश्मीर में हैं, हमे हमारा वह हिस्सा भी वापस चाहिए। सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकार ‘फ्राड’ हैं। इसके साथ ही मैं देश केप्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहना चाहता हूं कि समस्या का समाधान नहीं कर सकते तो उन्हें गद्दीछोड़ देनी चाहिए।
दरकशा अंद्राबी - अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर की बात होती है। इस्लाम के अनुसार अपने वतनऔर अपनी मिट्टी से मोहब्बत नहीं करने वाला काफिर होता है और हमारी मिट्टी हिन्दुस्तान की मिट्टीहै। कश्मीर मे दो चार गिलानी हं मुट्ठी-भर दहशतगर्द हैं, जो समस्या बढ़ा रहे हैं। सेना के रहतेहुए सरहदें पार कैसे होती हैं ? सब पैसे का मामला है। आई.एस.आई. ने पाकिस्तान का बुरा हालकर दिया अब भारत का पैसा भी वहां जा रहा है। इस्लाम धर्म में इंसानियत का स्थान सबसे ऊपरहै। गिलानी और उमर एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं, एक मस्जिद मे बोलता है, दूसरा असैंबली मं बोलता है और तीसरा अब्दुल्ला दिल्ली में बोलता है। मैं लाल चौक में बोलती हूँ कि हम हिन्दुस्तानी है और मुझे लगता है कि हम सबको मिलकर यह बात श्रीनगर में बोलनी चाहिए।इन्द्रश् जी - मैं संघ के प्रचारक के नाते 1983 से 2000 तक जम्मू-कश्मीर मे था। वहां के बहुत सेगांवों में मेरा जाना हुआ। लाशें देखीं और लोगों को रोते-उजड़ते हुए देखा। वहां घूमने के दौरान सम्पर्क में सभी दलों से जुड़े लोग आए। अलगाववादियों के खिलाफ मेरे वक्तव्य अखबारों में छपते रहते थे। मैं सोचता था कि मैं तो गांवों में कभी-कभी जाता हूँ लेकिन वहां रहने वाले तो 24 घण्टेबंदूकों के बीच में रहते हैं और मुझे लगता था कि खुदा है, खुदा था और खुदा रहेगा। गांव के लोग मुझसे पूछतेथे कि बेटे हमारे दर्द को कभी हिन्दुस्तान सुनेगा। एरिया, जाति, मजहब, दलो  से ऊपरउठकर सभी से मैंने सम्पर्क किया। शब्बीर, शज्जाद और गिलानी से भी मिला। मेरी पहचान एक देशभक्त और मानववादी के नाते है, इसलिए मैं सुन सकता था और सुना भी सकता था। कश्मीर की आवाज दिल्ली सुने इसलिए इस कार्यक्रम की योजना बनी, मुझसे लोगों ने पूछा कि कार्यक्रम में बडे कौन होंगें ? बड़े आदमी की गलती की सजा सदियां  तक भुगतनी पड़ती है। नेहरू, कर्णसिंह औरजी.एम. राजपुरी के हस्ताक्षरों से शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर 22 साल जेल में रखा गया।कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष रहे राजपुरी जी मुझसे पूछते थे ‘‘हमने हिन्दुस्तान से वफादारी निभाई लेकिन गद्दार हम पर कबतक हावी रहेंगे ?’’ यहां आने वाले कश्मीरियों को धमकियां दी गईं। फिर भी ये लोग आए हैंक्यों कि इनका एक सपना है ये वतन से मुहब्बत और कौम से वफादारी रखतेहैं। आज कश्मीर में गद्दारों को याद रखा जाता है। गद्दारों को भूलिए और वफादारों को पहचानिए।सच को कोई बदल नहीं सकता, कश्मीर भारत का है और भारत का रहेगा। हकीकत सदा हकीकत रहती है। 1945 में पाकिस्तान नहीं था, 1960 मे बांग्लादेश भी नहीं था इसीलिए हमें हकीकतके साथ जीने से ही रास्ता निकलेगा। कश्मीर में बड़ी संख्या में पहाड़ी, बक्करवाल-गुज्जर औरकश्मीरी पंडित शहीद हुए हैं। इन्हांने  जुल्म सहे और कुर्बानियां दीं लेकिन हिन्दुस्तान के लिए वफादारी नहीं छोडी़ । इनकी बेखौफी और वफादारी को हमे सलाम करना चाहिए। आज ऐतिहासिक दिवस है-बाल्मीकि जयंति है और कबाइली फौज को निकालने का दिन है। आज का कार्यक्रम प्रारम्भ है अन्त नहीं है। हम सब मिलकर कश्मीर को दोजख से निकालकर फिर से स्वर्ग बनाएंगे।उपरोक्त कार्यक्रम मैं लगभग 150 कश्मीरी बन्धु आए एवं इस कार्यक्रम की तैयारी के लिए आयोजक संस्थाओं के लगभग 60 कार्यकर्ता तैयारियों मे लगे रहे. दूसरे दिन राजघाट पर धरने का कार्यक्रम हुआउसके बाद भारतीय जनता पार्टी एवं कांग्रेस कार्यालयों में जाकर मिले
कार्यक्रम केअन्त मे पूर्व  सांसद एवं जैन टी.वी के मालिक डॉ. जे के जैन ने सभी आगतंकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के आयोजकों मैं फॉर इंटिग्रेटटे नेशनल सिक्यूरिटी मुस्लिम राष्ट्रवादी मंच, हिमालयपरिवार, भारतीय ग्रामीण परिषद, दिल्ली स्टडी ग्रुप, एवं भारतीय बुद्धिस्ट कलचर एसोसिएशन,जम्मू-कश्मीर विचार मंच एवं जम्मू-कश्मीर पीपल्स फोरम आदि संस्थाएं सम्मिलित हैं।

12 comments:

  1. समस्याओं से पहले तो नेताओं से निपटा जाना चाहिये..

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  2. क्यों हम कश्मीर पर आतंकवादियों की बात सुन रहे हं

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  3. पर लगता है अब वोट बैंक की राजनिती उस दौर मैं आ चुकी है जहां राष्ट्र समाज सब पीछे छूट जाते हैं

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  4. ट्रवीटर पर तवलीन सिंह ने लिखा है....सोनिया गांधी ओ aicc की मीटिंग मैं सिर्फ हिंदु आतंकवाद पर बोलते देख चिंता हुई

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  5. वो इस्लामिक टेरेरिज्म को कैसे भूल सकती है.....

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  6. सुहैल सैठ ने लिखा अंरुधति राय और फूलन देवी मैं सिर्फ एक ही फर्क है कि फूलन देवी राष्ट्रवादी थी.....

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  7. जम्मू,राजौरी,लद्दाख की देश भक्त जनता क्या कश्मीरी नहीं है......

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  8. आज सलीम खान वाली स्कीम मैं भी ट्राई कर रहा हूं देखता हूं क्या होता है.....

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  9. इनकी हरकतों को देख कर लगता है कि पांच चार फैक प्रोफाईल बनाने पङेंगे......

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  10. और मैं समीर लाल जी के पास पहुंचने वाला हूं

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  11. Bahut Acha Lekh, Aaj Rejnetaon ko apnai vot ke alawa or kuch dikhta he nahi.

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