ए क राजा के पास एक पालतू बंदर था …..उसने कभी राजा की जान बचाई थी इसलिए राजा उसे अपना सबसे विश्वसनीय साथी मानता था…..धीरे धीरे बंदर को अपने महत्व का अहसास हुआ और बंदर जो है अपनी मनमानियां करने लगा……धीरे धीरे राजा राज्य के महत्वपूर्ण फैसले भी बंदर की हां न के आधार पर करने लगा…राज्य की हालत दिन ब दिन बिगङने लगी…राजा के मंत्री ने एक दिन महाराज को समझाना चाहा तो राजा को य चीज नागवार लगी और उसने मंत्री को भी जेल मैं डलवा दिया…..इससे बंदर का आत्मविश्वास और बढ गया… एक दिन बंदर ने राजा को कहा कि महाराज आपकी सुरक्षा से मैं संतुष्ट नहीं हूं ये मंत्री संत्री विश्वसनीय नहीं है तो मैं चाहता हूं कि आपकी आंतरिक सुरक्षा का भार भी मैं ही उठाऊं…सेना पति ने उसे समझाया की रक्षा करते समय ध्यान रखें की महाराज की नाक पर मक्खी भी न बैठ पाये और बंदर के हाथ मैं तलवार पकङा दी गई..बंदर राजा जब सोता था तब भी उसकी तलवार लेकर रक्षा करता था…एक दिन एक मक्खी शयन कक्ष मैं घुस आई….वो कभी पांव पर मंडराती कभी हाथ पर..बंदर उछल उछल कर उसे भगाता…..और ये क्या हुआ मक्खी महाराज की नाक पर बैठ गई….बंदर को ये सहन नहीं हुआ और उसने पूरी ताकत से तलवार मक्खी पर दे मारी….मक्खी का तो पता नहीं पर महाराज………….के साथ जो हुआ वो बताने लायक नहीं है…..
तो हमारे राहुल बाबा भी तलवार लिए पूरे देश मैं घुम रहे हैं….मम्मी न उनको समझाया हुआ है कि जा बेटा जा खेल कूद तुझे प्रधानमंत्री बनना है…..पर इस देश की विडंबना देखिये कि इस देश मैं सरकार एक प्राईवेट कंपनी की तरह चलाई जा रही है…राहुल गांधी(माफ कीजिये राऊल विंसी)भी ये बात अच्छी तरह जानते हैं….कि ये सरकार उनके बाप दादों द्वारा खङी की गई एक प्राईवेट कंपनी है जिसका सी इ ओ उसे बनना है….(बाकि बनना न बनना अभी भी देश की जनता के हाथ मैं है)….और व्यापार मैं देश धर्म संस्कृति का कोई महत्व नहीं होता है…..श्रीमान को राष्ट्रवाद औऱ आतंकवाद का फर्क मालूंम नहीं….इन्हें दोनों ही कट्टरवाद नजर आते हैं…..वो दिन दूर नहीं जब कांग्रेस राहुल मैं भारत माता की जय जैसे कट्टरवादी नारे लगाने की मनाही होगी क्यों कि हो सकता है वो भी इनके प्रगति शील भाईयों के लिए स्वीकार्य न हो…..राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसे राष्ट्रवादी संगठन को सिमी के बराबर रखकर इन्होने अपने बौद्धिक दिवालिए पन का ही परिचय दिया हैं….इनको तो किसी ने ये भी नहीं बताया होगा कि जीवन भर संघ को गालियां देने वाले उनके नाना ने चीन से युद्ध के समय संघ की सेवाओं को देखते हुए गणतंत्र दिवस की परेङ मैं संघ को शामिल करने का बुलावा भेजा था…हमारे न्यायालय ने इसी कुत्सित विचार के वशीभूत कतिपय कांग्रैस सरकारों द्वारा विद्वेषपूर्ण तरीके से लगाये गये प्रतिबंधों को बार बार नकारा है और संघ को एक देशभक्त संगठन घोषित किया है…जबकि सिमी को उनकी ही पार्टी की सरकार ने देश द्रोही आतंकवादी,अलगाववादी संघठन घोषित किया है…………
देश की सांस्कृतिक परंपरा को संजोना…..हिंदु समाज मैं समरसता का भाव जगाना…..देश के लिए जीना सीखें ध्येय वाक्य लेकर चलने वाले संगठन के बारें मैं इतनी घिनौनी बात कहना एक तरह से सूरज पर थूकने जैसी हरकत ही है………जो खुद के मुंह पर ही पङता है……भगवान इस देश की जनता को सुबुद्धी दे और इस तलवार से देश को बचाये……
हमने तो बंदर के हाथ उस्तरे की ही बात सुन रखी थी लेकिन अब लगता है वो उस्तरा नहीं तलवार ही थी |
प्रत्युत्तर देंहटाएंदेश की सांस्कृतिक परंपरा को संजोना…..हिंदु समाज मैं समरसता का भाव जगाना…..देश के लिए जीना सीखें ध्येय वाक्य लेकर चलने वाले संगठन के बारें मैं इतनी घिनौनी बात कहना एक तरह से सूरज पर थूकने जैसी हरकत ही है………
प्रत्युत्तर देंहटाएंबिलकुल सही कहा आपने.....
बिल्कुल ठीक...
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