डां अनवर जमाल साहब आप ने पिछले दिनों मैं हिंदु धर्म के बारें मैं जो ज्ञान बघारा हैं वो किस काबिल है वो तो मेरे पास शब्द नहीं पर क्यों कि आपकी फोटो देखकर पढे लिखे इंसान लगते हो इसलिए कुछ कहने का मन किया……
कभी मौका लगे तो हरिद्वार जरूर जाना …..और गंगा मैं स्नान करना….वहां से बाहर निकलो तो वहां कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके पास आपकी पुश्तों का हिसाब किताब होता हैं….निश्चित रूपसे आप अपने पुरखों के नाम पते जान पाओगे तो जरूर पूछना……क्यों कि मेरे खयाल से इस्लाम मैं अपने बाप दादा के नाम पता करना कोई गुनाह न होगा……वो हिंदु ही थे …..राम को मानने वाले ,कृष्ण के भक्त……भोले शंकर का पुजारी…..सिर पर तिलक लगाये हुए…..कोई सात्विक प्रवृत्ति का व्यक्ति……वो खुश होंगे अपने पुरखों की जमीन पर खेती करते होंगे…..उन्हें अपने पुरखों पर नाज होगा…..जो राम और कृष्ण जैसे होंगे….बुद्ध और महावीर होंगे……उन्हें अपनी संस्कृति पर भी गर्व होगा…….देश और समाज के नाम पर बलिदान होने के संस्कार उन्हें अपने घुट्टी मैं मिले थे…….कशमीर से कन्या कुमारी तक औऱ सुदूर गांधार(अफगानिस्तान) से लेकर सूदूर पूर्व तक फैले इस देश औऱ संस्कृति के रक्षक थे वे…..बहादुर…समझदार ….शालीन….वे खुश किस्मत समझते थे अपने आप को कि देवताओं के लिए भी दुर्लभ देश मैं उनका जन्म हुआ था…..सब कुछ एक सपने की तरह था. उनके परिवार बङे बङे ……महिलाएं बच्चे ….सब एक दूसरे का सम्मान करने वाले …इस धरती को भारत माता को ….गाय को मां मानने वाले …..
पर एक दिन अल्लाहो अकबर बोलते हुए …..बङी बङी दाढी बढाये हुए दूर देश से आये हुए लुटेरों ने आधी रात हमला किया……वे आये हैं ,क्यों कि उनको लूट केमाल मैं से पांचवां हिस्सा मिलने वाला हैं…… उनकों मारने ,जलाने,उनकी स्त्रियों के साथ बलात्कार करने…..क्यों कि ऐसा करने से उनका अल्लाह उन्हें जन्नत बख्शेगा….. वे लोग बहुत बहादुरी से लङे…..आपके बाप दादे….…..हर हर महादेव का जयकारा लगाकर टूट पङें उन टिड्डी दल की तरह आते जा रहे जालिम लुटेरों पर…….केसरिया बाना पहनकर वे मुट्ठी भर लोग जी जान से लङें……और देश,धर्म और समाज की रक्षा करते हुए बलिदान हो गये…….हमारा इतिहास उन तुम्हारे पुरखों की बलिदान की कहानियों से भरा पङा है…..लुटेरों ने उनका गांव जला दिया…. हजारों हजारों साल से उस समय से भी पहले जब उन लुटेरों के बाप दादे झिंगालाला गाते हुए नंगे बदन घूमा करते होंगे की इस सनातन संस्कृति के प्रारंभ से लेकर अब तक की उस हर चीज को तहस नहस कर दिया उनके मंदिर .पुस्ताकालय,ज्ञान विज्ञान के कैंद्र जिन पर उनको गर्व था….. उनके छोटे छोटे बच्चों को भालों की नोक पर उछाल उछाल कर मारा…….तुम्हारी मातोऔं बहनों को बेइज्जत किया…बचें हुए लोगों को उन्होने अपना भगवान बदलने को कहा तलवार की नोक पर ….कुछ बहादुर लोग जिन्हें अपना पूर्वजों का धर्म छोङना गवारा नहीं था…..वे मार दिये गये …..दिवार मैं चुनवा दिया गया…..उनके सामने उनको तङपा तङपा कर मारा गया पर वे नहीं झुके……….शायद तीन सो ,चार सौं या के हजार साल पहले शायद तुम्हारी दसवीं या बीसवीं पीढी ही रही होगा…….. ……..कुछ लोग जो जान बचाने के लिए कुछ समय के लिए ही सही इस्लाम कूबूल करने के लिए तैयार होगये…….हो सकता है सही समय वापिस आये तब वे इस सबको सुधारेंगे……अपनों का बदला लेंगे …शायद उसी जनम मैं या के उनके मरने के बाद उनके बेटे पोते..पर उन्हें वो मौका कभी न मिला…
पर अब उनको मार मार कर ये पढाया गया कि कि तुम्हारा भगवान वो नहीं जो तुम्हें कण कण मैं प्राण देखने की शक्ति देता था…..तुहारा भगवान दूसरे को सुखी करने पर खुश होने वाला नहीं पर वो तो तुम सामने वाले को मारकर,चाहे धोखे से ही सही अपना जैसा बना लोगे तो ही खुश होने वाला है……उन्हें अपने ही बंधु बांधवों का दुश्मन बना दिया……अब उनकी आस्था गाय औऱ भारत माता मैं नहीं बल्कि सिर्फ औऱ सिर्फ उस अल्लाह मैं रह गई थी …..जो उनके भगवान राम की नगरी अयोध्या से दूर पश्चिम मैं मक्का और मदीना मैं रहता था…..और जिहाद और जिहाद का हुकुम देता था…..
सदियां बीत गई आज डां अनवर जमाल उन्ही लोगों की संतान जो उन लुटेरों से त्रस्त होकर मुसलमान बन गयें थे अपने पुरखों पर कीचङ उछाल रहा हैं…….क्यों कि उसने सदियों से यही सीखा है……अपनी जङों से कटना……क्यों कि उन लोगों ने पीढियों तक यही जहर उनके दिलो दिमाग मैं घोला……अब उसका एक ही मकसद है जो उन अजड्ड लुटेरों ने उसे बताया था …..जिहाद….
जमाल…..साहब कभी जिंदगी मैं मौका लगे तो हरिद्वार जरूर जाना …..और गंगा मैं स्नान करना….वहां से बाहर निकलो तो वहां कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके पास आपकी पुश्तों का हिसाब किताब होता हैं….निश्चित रूपसे आप अपने पुरखों के नाम पते जान पाओगे तो जरूर पूछना……वे आज भी वहीं खङे है तुमहारी प्रतीक्षा मैं कि एक दिन वो मौका आयेगा जब उनका कोई वारिस आयेगा और उनका पिंड दान करेगा……जमाल साहब कभी जिंदगी मैं मौका लगे तो हरिद्वार जरूर जाना
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