शुक्रवार, 19 मार्च 2010

डां अनवर जमाल साहब कभी मौका लगे हरिद्वार जरूर जाना……

डां अनवर जमाल साहब आप ने पिछले दिनों मैं हिंदु धर्म के बारें मैं जो ज्ञान बघारा हैं वो किस काबिल है वो तो मेरे पास शब्द नहीं पर क्यों कि आपकी फोटो देखकर पढे लिखे इंसान लगते हो इसलिए कुछ कहने का मन किया……

कभी मौका लगे तो हरिद्वार जरूर जाना …..और गंगा मैं स्नान करना….वहां से बाहर निकलो तो वहां कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके पास आपकी पुश्तों का हिसाब किताब होता हैं….निश्चित रूपसे आप अपने पुरखों के नाम पते जान पाओगे तो जरूर पूछना……क्यों कि मेरे खयाल से इस्लाम मैं अपने बाप दादा के नाम पता करना कोई गुनाह न होगा……वो  हिंदु ही थे …..राम को मानने वाले ,कृष्ण के भक्त……भोले शंकर का पुजारी…..सिर पर तिलक लगाये हुए…..कोई सात्विक प्रवृत्ति का व्यक्ति……वो खुश होंगे अपने पुरखों की जमीन पर खेती करते होंगे…..उन्हें अपने पुरखों पर नाज होगा…..जो राम और कृष्ण जैसे होंगे….बुद्ध और महावीर होंगे……उन्हें अपनी संस्कृति पर  भी गर्व  होगा…….देश  और समाज के नाम पर बलिदान होने के संस्कार उन्हें अपने घुट्टी मैं मिले थे…….कशमीर से कन्या कुमारी तक औऱ सुदूर गांधार(अफगानिस्तान) से लेकर सूदूर पूर्व तक फैले इस देश औऱ संस्कृति के रक्षक थे वे…..बहादुर…समझदार ….शालीन….वे खुश किस्मत समझते थे अपने आप को कि देवताओं के लिए भी दुर्लभ देश मैं उनका जन्म हुआ था…..सब कुछ एक सपने की तरह था.      उनके परिवार बङे बङे ……महिलाएं बच्चे ….सब एक दूसरे का सम्मान करने वाले …इस धरती को भारत माता को ….गाय को मां मानने वाले …..

पर एक दिन अल्लाहो अकबर बोलते हुए …..बङी बङी दाढी बढाये हुए दूर देश से आये हुए लुटेरों ने आधी रात हमला किया……वे आये हैं  ,क्यों कि उनको लूट केमाल मैं से पांचवां हिस्सा मिलने वाला हैं…… उनकों मारने ,जलाने,उनकी स्त्रियों के साथ बलात्कार करने…..क्यों कि ऐसा करने से उनका अल्लाह उन्हें जन्नत बख्शेगा…..         वे लोग बहुत बहादुरी से लङे…..आपके बाप दादे….…..हर हर महादेव का जयकारा लगाकर टूट पङें उन टिड्डी दल की तरह आते जा रहे जालिम लुटेरों पर…….केसरिया बाना पहनकर वे मुट्ठी भर लोग जी जान से लङें……और देश,धर्म और समाज की रक्षा करते हुए बलिदान हो गये…….हमारा इतिहास उन तुम्हारे पुरखों की बलिदान की कहानियों से भरा पङा है…..लुटेरों ने उनका गांव जला दिया…. हजारों हजारों साल से उस समय से भी पहले जब उन लुटेरों के बाप दादे झिंगालाला गाते हुए नंगे बदन घूमा करते होंगे       की इस सनातन संस्कृति के प्रारंभ से लेकर अब तक की उस हर चीज को तहस नहस कर दिया उनके मंदिर .पुस्ताकालय,ज्ञान विज्ञान के कैंद्र जिन पर    उनको गर्व था…..    उनके छोटे छोटे बच्चों को भालों की नोक पर उछाल उछाल कर मारा…….तुम्हारी मातोऔं बहनों को बेइज्जत किया…बचें हुए लोगों को उन्होने अपना भगवान बदलने को कहा तलवार की नोक पर ….कुछ बहादुर लोग जिन्हें अपना पूर्वजों का धर्म छोङना गवारा नहीं था…..वे मार दिये गये …..दिवार मैं चुनवा दिया गया…..उनके सामने उनको तङपा तङपा कर मारा गया पर वे नहीं झुके……….शायद तीन सो ,चार सौं या के हजार साल पहले शायद तुम्हारी दसवीं या बीसवीं पीढी ही रही होगा…….. ……..कुछ लोग जो जान बचाने के लिए कुछ समय के लिए ही सही इस्लाम कूबूल करने के लिए तैयार होगये…….हो सकता है सही समय वापिस आये तब वे इस सबको सुधारेंगे……अपनों का बदला लेंगे …शायद उसी जनम मैं या के उनके मरने के बाद उनके बेटे पोते..पर उन्हें वो मौका कभी न मिला…

पर अब उनको मार मार कर ये पढाया गया कि कि तुम्हारा भगवान वो नहीं जो तुम्हें कण कण मैं प्राण देखने की शक्ति देता था…..तुहारा भगवान दूसरे को सुखी करने पर खुश होने वाला नहीं पर वो तो तुम सामने वाले  को मारकर,चाहे धोखे से ही सही अपना जैसा बना लोगे तो ही खुश होने वाला है……उन्हें अपने ही बंधु बांधवों का दुश्मन बना दिया……अब उनकी आस्था गाय औऱ  भारत माता मैं नहीं बल्कि सिर्फ औऱ सिर्फ उस अल्लाह मैं रह गई थी …..जो उनके भगवान राम की नगरी अयोध्या से दूर पश्चिम मैं मक्का और मदीना मैं रहता था…..और जिहाद और जिहाद का हुकुम देता था…..

सदियां बीत गई आज डां अनवर जमाल उन्ही लोगों की संतान जो उन लुटेरों से त्रस्त होकर मुसलमान बन गयें थे अपने पुरखों पर कीचङ उछाल रहा हैं…….क्यों कि उसने सदियों से यही सीखा है……अपनी जङों से कटना……क्यों कि उन लोगों ने पीढियों तक यही जहर उनके दिलो दिमाग मैं घोला……अब उसका एक ही मकसद है जो उन अजड्ड लुटेरों ने उसे बताया था …..जिहाद….

जमाल…..साहब कभी जिंदगी मैं मौका लगे तो हरिद्वार जरूर जाना …..और गंगा मैं स्नान करना….वहां से बाहर निकलो तो वहां कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके पास आपकी पुश्तों का हिसाब किताब होता हैं….निश्चित रूपसे आप अपने पुरखों के नाम पते जान पाओगे तो जरूर पूछना……वे आज भी वहीं खङे है तुमहारी प्रतीक्षा मैं कि एक दिन वो मौका आयेगा जब उनका कोई वारिस आयेगा और उनका पिंड दान करेगा……जमाल साहब कभी जिंदगी मैं मौका लगे तो हरिद्वार जरूर जाना

32 comments:

  1. मिहिर जी, रहम करों गंगा पर ! गंगा में नहाने से शरीर का मैंल धुलता है, मन का नहीं ! क्या पता ऊपर वाले ने भी किसी महिमा के तहत खिन्न होकर इसी वजह से इस देश को ४-४ बार गुलामियों की जंजीरों में जकडवाया हो ताकि मन के मैले लोग धर्म परिवर्तन कर ले और हिन्दू धर्म को इनसे छुटकारा मिले ???????????????????????????????
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  2. मैने अपनी टिप्पणी कल कर दी थी. अब क्या लिखुं?
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  3. तत्वचर्चा के मिहिरभोज जी! आप निहायत ही इमोशनल हो रहे है। और इतिहास के तथ्यों को भावनाओं की बाढ़ में बहा ले जा रहे हैं। यह इतिहास के साथ खिलवाड़ जैसा है। तस्वीर से तो आप भी पड़े लिखे नजर आते हैं, यही वजह है कि कुछ कहने की गुस्ताख़ी की है। किसी भी धर्म के बारे में सच बोलना फालतू में विवाद को जन्म दे देता है। दरअसल आपको इतिहास तमीज से पड़ने की जरूरत है और विश्लेशणेां को समझने की भी। आप भारतीय मुसल्मानों से तो अपेक्षा कर रहे है कि वो हरिद्वार जा कर अपने पुरखों को तलाशें वहां वो हिन्दु रूप में मिल जाऐंगे। क्यूंकि दमनकारी मुसमान शासकों ने उन्हें जबरदस्ती मुसल्मान बनाया है। लेकिन आप की समझ में ये भी कभी आ पाएगा कि आप हिन्दु जिन आर्यों केा अपना पूर्वज मानते आऐ हैं वे आर्य भी मध्य ऐशिया से आ कर (कुछ विद्वानों के मत अन्य जगहो से आर्यों के आने पर भी हैं) इन मुसल्मानों की तरह यहां बसी विभिन्न जातियों को को जीत यहां बसे थे। उन्होंने यहा पराजित की जातियों को खुद में शामिल कर उन्हें वर्तमान के ‘दलित’ बनाया। अब बताइये अगर कोई दलित आपके जैसे ही कोई हरिद्वार वाला तर्क लेकर आपकी जातीय शुद्वता पर प्रश्न करने लगे तो? खैर आर्यों ने तो इतना दमन किया कि दलित अब तक कुछ बोलने के भी काबिल नहीं हो पाऐ है। ................................. यूं तो हमें भारतीय छद्म लोकतंत्र से तमाम नाइत्तेफाकी है। लेकिन इसमें जितने मूल्य लोकतंत्र के हैं उन्हैं तो जिन्दा रखो यार। तस्वीर में पढ़े लिखे लगते हो सो कह रहा हूं वरना यहां तो कुछ खुले पन से कहना दंगा बरपा देता है।................... उम्मींद है आप इतिहास को मानवीय समझा पाऐंगे जो कहीं प्रस्तर युगीन मानव से विकसित हुआ है। न कि सतयुग.............. वगैहरा से।
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  4. @ Rohit Joshi Said
    "लेकिन आप की समझ में ये भी कभी आ पाएगा कि आप हिन्दु जिन आर्यों केा अपना पूर्वज मानते आऐ हैं"

    जनाव रोहित जोशी जी, क्षमा करे ,
    लगता है कि आप लेख पढने के बाद भावनाओं में बहकर ID में अपना वर्तमान नाम (आपके माता -पिता द्वारा रखे गए नाम) को लिखना भूलकर अपने परदादाजी का नाम लिख गए !
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  5. पुराने पोस्ट में शाब्दिक गलतियां हैं। कृपया शुद्व पोस्ट को यहां पढें...............
    तत्वचर्चा के मिहिरभोज जी! आप निहायत ही इमोशनल हो रहे है। और इतिहास के तथ्यों को भावनाओं की बाढ़ में बहा ले जा रहे हैं। यह इतिहास के साथ खिलवाड़ जैसा है। तस्वीर से तो आप भी पड़े लिखे नजर आते हैं, यही वजह है कि कुछ कहने की गुस्ताख़ी की है। नहीं तो किसी भी धर्म के बारे में सच बोलना फालतू में विवाद को जन्म दे देता है। दरअसल आपको इतिहास तमीज से पड़ने की जरूरत है और विश्लेशणेां को समझने की भी। आप भारतीय मुसल्मानों से तो अपेक्षा कर रहे है कि 'वो हरिद्वार जा कर अपने पुरखों को तलाशें वहां वो हिन्दू रूप में मिल जाऐंगे। क्यूंकि दमनकारी मुसमान शासकों ने उन्हें जबरदस्ती मुसल्मान बनाया है।' लेकिन आप की समझ में ये भी कभी आ पाएगा कि आप हिन्दु जिन आर्यों केा अपना पूर्वज मानते आऐ हैं वे आर्य भी मध्य ऐशिया से आ कर (कुछ विद्वानों के मत अन्य जगहो से आर्यों के आने पर भी हैं) इन मुसल्मानों की तरह यहां रह रही विभिन्न जातियों को जीत यहां बसे थे। उन्होंने पराजित की जातियों को खुद में शामिल कर उन्हें वर्तमान के ‘दलित’ बनाया। अब बताइये अगर कोई दलित आपके जैसे ही कोई हरिद्वार वाला तर्क लेकर आपकी जातीय शुद्वता पर प्रश्न करने लगे तो?......... खैर आर्यों ने तो इतना दमन किया कि दलित अब तक कुछ बोलने के भी काबिल नहीं हो पाऐ है। ................................. यूं तो हमें भारतीय छद्म लोकतंत्र से तमाम नाइत्तेफाकी है। लेकिन इसमें जितने मूल्य लोकतंत्र के हैं उन्हैं तो जिन्दा रखो यार। तस्वीर में पढ़े लिखे लगते हो सो कह रहा हूं वरना यहां तो कुछ खुले पन से कहना दंगा बरपा देता है।................... उम्मींद है आप मानवीय इतिहास को समझ पाऐंगे जो कहीं प्रस्तर युगीन मानव से विकसित हुआ है। न कि सतयुग.............. वगैहरा से।
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  6. पी.सी.गोदियाल जी!
    कहने के मायने आप जैसे हिन्दु से है। दरअस्ल भारत में हिन्दू होने पर गर्व करने वालों ने जो कारनामे पिछले दिनों कर दिखाए है। अब वैसा हिन्दु होने पर शर्म है हमें। तो क्या कीजे...... हिन्दु होने से पहले हर हमेशा मानव हूं।............ जहां आपको शक हो रहा है... u can also visit my blog....... acanvas.blogspot.com
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  7. भैया रोहित जोशी ,
    तो ये बताइए कि आप कब धर्म परिवर्तन कर रहे है ? क्योंकि बेहतर है जल्दी करले, वहाँ भी ऐसे शर्मशार लोगो की वजह से हाउस फूल होने वाला है , अफसोस हुआ यह जानकार कि कुछ हुसैन(विकृत मानसिकता वाला कायर जो सिर्फ कला को दूसरे के धर्म पर अपनाता है) के चेले उत्तराखंड ने भी पाले पोषे है !Shame on you !!
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  8. मुझे गर्व है कि मैं हिंदु हूं....और आप ये सब लिखने के लिए इसलिए जीवित हैं कि आपके पुरखों ने उन आततायियों के सामने सर नहीं झुकाया.....ये दलित वाला राग गा गाकर क्यों आप अपने आप को और सारे समाज को गुमराह कर रहे हैं.....महाशय आप तो ब्राह्मण होंगे....पर मैं तो एक आदिवासी जाति का व्यक्ति हूं.....हर देश काल मैं जो व्यक्ति शक्तिशाली होता है वो अपने हिसाब से नियम कानून बनाता हैं.....और निश्चित रूप से सदियों तक ऐसा ही चला...जो वर्ण व्यवस्था कर्म सूचक थी वो जन्म सूचक बनती चली गई.....पर हिंदु धर्म हमें ये छूट देता हैकि हम त्रुटियों को सुधारें....हिंदवः सौदरा सर्वै ,न हिंदु पतितो भवेत्....कि घोषणा करने वाले माधव राव गोलवलकर को किसी ने फतवा देकर समाज से बेदखल नहीं किया बल्कि आज उनके बताये हुए रास्ते पर चलकर संघ जैसे संगठन समाज के संगठन मैं लगे हैं....पर वो आप को दिखाई नहीं देंगे....जहां तक तमीज औऱ आंखे खोलने की बात हैं तो हमारी तो खुली है श्रीमान अपनी खोलिये....जो सच्चाई नहीं जानकर अंग्रैजों द्वारा लिखित इतिहास और एन डी टी वी के आईने से समाज को देखते हैं.....
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  9. उपरोक्त टिप्पणी तमीजदार रोहित जोशी जी के लिए हैं
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  10. @रोहित जोशी जी - आप पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मलेशिया जाकर वहां के अल्पसंख्यकों के लिये क्यों नहीं लड़ते...

    अब किस तरह के हिन्दुओं के कारण गुलाम हुये यह बताना अच्छा नहीं लगेगा...

    पढ़ते आ रहे हैं कि सवा मन वजन हो गया था जनेऊ और चोटियों का जिन्हें आपके पुरखों ने धर्म के लिये अपना सीस चढ़ाकर अर्पित किया था.
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  11. Ek naya gaddar ROHIT beech main kanah se aa gaya. ise to pakistan main hona chahiye the.

    Apni Sanskrit ko mitti main milane wale sriman Rohit, Arya Madhya Asia se Aaye sahi hai magar ye bhi pata karna ki us jamane main Bharat ki Seema Rekha kanah tak thi. VARMA SE IRAN TAK aur pura UAE kisi jamane main Bharat ka hissa hua karta tha.
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  12. तारकेश्वर जी ने सही जबाव दिया है. यद्यपि बाल गंगाधर तिलक के अनुसार आर्य कहीं बाहर से नहीं आये थे. यह भ्रान्ति सिर्फ भारतीयों के बीच दरार और गहरी करने के लिये उत्पन्न की गयी थी.
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  13. baqi baton ke bare men kuchh kahunga to apki bhavnayen aahat ho jayengi.
    is liye phir kabhi kahunga.
    lekin jitne kam apne musalmano ke ginaye hain .
    unse zyada to mahabharat aadi yudhhon men ho chuke hain.
    kya woh sab musalman the?
    manu smrati men loot ke maal ke batware ki puri vidhi bhi di hui hai.
    main nahin likhunga.
    aap khud padh len.
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  14. जब बाबर आया तो इब्राहिम लोदी ने मुकाबला किया.
    हुमायूं का मुकाबला शेरशाह से हुआ. अहमद शाह अब्दाली का मुकाबला मुहम्मद शाह से हुआ. पृथ्वीराज की लड़ाई जैचंद से थी जिसने एक बाहरी आदमी की सहायता ली. इस तरह हिन्दुओं से ज्यादा तो मुसलमानों ने ही बाहरी आक्रमणकारियों से मुकाबला किया. आप ज़बरदस्ती अपनी ऊंची कर रहे हो.
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  15. आप का इतिहास का ज्ञान थोङा कम है इंम्पैक्ट महोदय.....मुहम्मद गौरी यहां हमलावर था .....उस ने जैचंद की सहायता ली.....खैर ये छोङो कि किस का मुकाबला किस से हुआ.....क्या ये सच नहीं कि जो भी मुस्लिम हमलाबर आया उसका प्रमुख उद्धेश्य यहां की सनातन संस्कृति को नष्टकर यहां इस्लाम फैलाया......औऱ किसी एक भी व्यक्ति ने अपनी आस्था इस्लाम स् प्रभावित होकर नहीं बल्कि तलवार के जोर पर करी थी.....जिन मैं आप के बाप दादे भी शामिल रहें होंगे....
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  16. महोदय, इतिहास का ज्ञान आप ही को कम है वरना आप आक्रमणकारियों को मुसलमान और निपटने वालों को हिन्दू कभी न बताते. वास्तविकता तो यह है की इसमें हिन्दू मुस्लिम जैसा कोई मामला ही न था. एक को अपनी सत्ता फैलानी थी और दूसरे को बचानी थी. अगर जैचंद ने गोरी को दूसरे हमले का निमंत्रण न भेजा होता तो गोरी हमला करने का प्रयास ही न करता.
    रही बात इस्लाम में आस्था की, तो आप मुझे बताओगे की कौन सी तलवार हिन्दुओं को मुस्लिम फकीरों की मजारों पर शीश नवाने पर मजबूर करती है? आप तो राजस्थान के हो. अजमेर की दरगाह में जाते ही होगे.
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  17. ha ha ha ha ha ha............ maine kaha tha किसी भी धर्म के बारे में सच बोलना फालतू में विवाद को जन्म दे देता है। .............. pakde raho bhai apni apni langot........... jab poorvagrahon se nijat pa loge to charchaen karenge............... jaha tak mere dharm parivartan ka sujhav godiyal ji de rahe hain...... samajhiye janab main duniya k kisi bhi dharm ka virodhi hoon........ duniya ke itihas ko padhte samajhte jitna meri samajh me aaya dharm sosan ke kendr rahe hain or........ iski pavitrata k loot ka mahajaal hai........
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  18. हां ठीक कहते हैं आप अजमेर शरीफ मैं बहुत से हिंदु भी जाते हैं....पर हिंदु तो मदर मैरी के चर्च मैं भी जाते हैं .....पर क्या किसी मुसलमान को मंदिर मैं जाते देखा....नहीं ना.....इसका कारण कि हिंदु धर्म इतनी सहिष्णुता देता हैं अपने मानने वालों को.....पर क्या कल्पना इस्लाम के मानने वालों से कर सकते है....और मेरा लिखने का मतलब ये कतई नहीं....आप इसे पूरा पढें.....और कौन किससे लङा ये भी नहीं बल्कि बंधुऔ केवल और केवल आपके लिए मंतव्य है कि आप जो हिंदुस्तान मैं रहने वाले मुसलमान हैं उनकी सब की यही कहानी है जो ऊपर मैंने लिखी है.....मार मार कर बनाये गये.....
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  19. दरअसल ये क्रिश्चियन अंग्रेजों का बनाया हुआ गलत इतिहास है जो उन्होंने अपनी इस्लाम घृणा का सुबूत देते हुए आपको और हमें पढ़ाया. और आज भी पूरी दुनिया में इस्लाम घृणा की ये मुहिम जारी है. अब आप तर्क से काम लो. एक बादशाह जिसको अपनी सत्ता फैलानी भी है और चलानी भी है, क्या मंदिर तोड़कर और औरतों की इज्ज़त लूटकर, ज़बरदस्ती लोगों का मज़हब बदलवाकर अपनी सत्ता चला सकता है? जबकि स्वेयें उसके भाई ही उसके खिलाफ साज़िश कर रहे हों? आज पुलिस बीच सड़क पर रखी किसी ऐरे गिरे नेता की मूर्ति हटा दे तो पूरे प्रदेश में दंगा भड़क उठता है, यहाँ तो बाहरी आक्रमणकारी की बात थी. उसे तो यहाँ की पूरी सिचुएशन भी पता नहीं थी. आक्रमणकारियों का साथ हिन्दुओं ने भी दिया था तो क्या वे उनकी भावनाओं को इस तरह कुचल सकते थे? वास्तविकता ये है की मार मार कर कोई मुसलमान नहीं बनाया गया, ये हिन्दू धर्म में व्याप्त हो चुकी बुराइयां (जो की पहले नहीं थीं) और इस्लाम धर्म की सादगी थी जिसने उनका धर्म परिवर्तन करा दिया.
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  20. महान महोदयो,
    क्यूं फालतू की बहस में उलझे हुए हो, आज तो विज्ञान भी यह सिद्व कर चुका है कि पूरी मानव जाति का 99 प्रतिशत से भी अधिक जेनेटिक ढ़ाचा समान है। और बांकी 1 प्रतिशत से भी कम, केवल हमारे बालों का रंग, त्वचा का रंग आदि मामूली चीजों को निर्धारित करता है। तमाम धर्म तो एक दौर में बने जिनका मनुष्य के विकास से कोई लेना देना अब नहीं रह गया है। आज के दौर में समाज को धर्म की कोई जरूरत ही नहीं है। और भी ग़म हैं जमाने में.......... उन पर बात करें मुकम्मल हो
    ‘दीप प्रकाश’
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  21. Tarkeshwar Giri,says
    'Ek naya gaddar ROHIT beech main kanah se aa gaya.'
    mansikta jhalak gai tarkeswar ji.......... jo aapse sahmat nahi usko na sunnge na apni baat kahne denge.... or jahan yah kah rahe hain ki....... 'Arya Madhya Asia se Aaye sahi hai magar ye bhi pata karna ki us jamane main Bharat ki Seema Rekha kanah tak thi. VARMA SE IRAN TAK aur pura UAE kisi jamane main Bharat ka hissa hua karta tha.'........... jab aarya yahan aaye the to Bharat jaisa koi desh tha hi nahi...na hi desh jaisi koi chij duniya me hua karti thi........... poori duniya me us waqt kabilai samaj hua karta tha............ kher aapse kya baat karni jo sirf 'poranik kathaon' ko hi apna itihaas manne wale log hain........ek baat or apne kaha..... 'Apni Sanskrit ko mitti main milane wale sriman Rohit'......... sanskriti ka matlab samajhte hai aap???????????? poochiyega apne aap se.................
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  22. 'तारकेश्वर' जी से सहमत 'भारतीय नागरिक - Indian Citizen' के भी यही हाल हैं...........
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  23. रोहित जी बामियान की मूर्तियां आपके बाप दादा तो नहीं बनाकर आये थे.......
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  24. मिहिरभोज जी!
    आप क्या कहना चाह रहे हैं साफ समझ नहीं आ रहा।
    1.शायद यह कहना चाह रहे हैं कि ‘बामियान’ की मूर्तियां आर्यों द्वारा बनाई गई हैं। संभवतः इस बात से यह शाबित करना चाह रहे हों कि यही ‘भारत वर्ष’ की सीमाओं का प्रमाण हैं। महोदय अपने ज्ञान को विस्तार दें बामियान में प्राप्त अधिकतर मुर्तियां बौद्ध कालीन हैं। और आप हम तो आर्यों की बात कर रहे हैं, ये तो बौद्ध धर्म के अभ्युदय से कई पहले की बात है।......
    2.और यदि आप यह कहना चाह रहे हैं कि अफगानियों ने वहां बौद्धमूर्तियां तोड़कर जो मुसल्मानी दिखाई है........ वह निन्दनीय और भर्त्सना के योग्य है.......। तो ये तो मैं भी मानता हूं।...... लेकिन मैं साथ में ये भी मानता हूं कि भारत में बाबरी मस्जिद गिराकर जो हिन्दुओं ने कर दिखाया है। वह भी इतना ही निन्दनीय और भर्त्सना के योग्य है। यहां दोनों जगह धर्मों के नाम महज अलग है। लेकिन नीयत और मानसिकता एक ही है।
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  25. भूल सुधारः- कृपया पिछली पोस्ट में अफगानियों को तालिबानी पढ़ें।
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  26. रोहित जी मैं तो उस सनातन संस्कृति की बात कर रहा हूं जो हजारों साल से चली आ रही हैं....आप जिस इतिहास की बात करते हैं जो अंग्रेजों ने लिखा है.....या उनके पिट्ठुऔं ने...क्या आप बता सकते हैं ....महाभारत जैसा महाकाव्य किस सन् मैं लिखा गया था....वाल्मिकी रामायण कब लिखी गई ....वो भी संस्कृत जैसी भाषा मैं जो कि आज भी विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा समझी जाती है....और आपके ही शब्दों मैं माना जाये तो या तो वो देवकृपा से रातों रात बन गई या फिर आप भगवान जैसी कोई चीज नहीं मानते हैं तो हजारों साल मैं धीरे धीरे करके विकसित हुई और उतनी ही पुरानी है् हमारी सनातन संस्कृति....और बौद्ध कालीन संस्कृति जिस की आप बात करते हैं वो उस सनातन संस्कृति का हिस्सा भर है......रही बात राम मंदिर की तो वो तो राम मंदिर ही था.....पहले भी और आज भी.....वहां टूटा कुछ नहीं बल्कि राष्ट्र का स्वाभिमान पुनरुस्थापित हुआ है.....ये बात आप जैसे हिंदुओं के समझने की आवश्यकता है कि हमारे लिए राम ज्यादा महत्वपूर्ण है या बाबर जैसा आक्रांता
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  27. मिहिर भोज जी!
    आपके द्वारा की गई उपरोक्त टिप्पणियों से मैं जिस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं वह यह है कि आपके सारे आग्रह राजनीतिक हैं। इतिहास के निर्पेक्ष अध्ययन का न आपका कोई इरादा है। न आपको इसकी जरूरत महशूश होती है।....ऐसे में आपसे इतिहास को रौंद, राजनीति के लिए कुतर्क गढ़ना तो मैंने सीखना नहीं है भाई... तो इस पोस्ट को मेरा आंखिरी पोस्ट समझें। क्यूंकि आप पूर्वाग्रही हैं। ज्ञान के नऐ तथ्यों के लिए आपके सारे कपाट बन्द हैं। आप आर. एस. एस. के धर्म की राजनीति करने वालों को ही दुनिया का अप्रतीम इतिहासकार मानते हैं। तो ऐसे में आपसे इतिहास की चर्चा का कोई लाभ नहीं है। बहरहाल एक बात और जो समझ आई है या तो आप मूर्ख हैं या फिर धूर्त।
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  28. जिसे अपने बाप को बाप कहने से पहले डीएनए टेस्ट से हासिल सर्टिफिकेट चाहिये उसके लिये क्या कहा जाये...
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  29. लोर्ड मैकाले जब यह देश छोड़ के गया था तब उसने अपनी संसद को बताया था की भारत के लोग अपनी संस्कृति से जुड़े हुए है..उसके कारन उनको भ्रष्ट करना या उनपर राज करना कठिन है(यह भावार्थ है ..अगर उनको उनके सनातन इतिहास और संस्कृति के काट दिया जाए तो उनके अपने इतिहास के प्रति कोई आदर नही रहेगा और इस देश में ही काले अंग्रेज पैदा होगे जिन्हें अपने ही देश और समाज से नफरत होगी ..उदहारण आज देश लिया मैंने आपके रूप में ..की काले अंग्रेज पैदा भी हो गये और पैदा करने लायक भी..
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  30. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
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  31. rohit joshi--लोर्ड मैकाले जब यह देश छोड़ के गया था तब उसने अपनी संसद को बताया था की भारत के लोग अपनी संस्कृति से जुड़े हुए है..उसके कारन उनको भ्रष्ट करना या उनपर राज करना कठिन है(यह भावार्थ है) ..अगर उनको उनके सनातन इतिहास और संस्कृति के काट दिया जाए तो उनके अपने इतिहास के प्रति कोई आदर नही रहेगा और इस देश में ही काले अंग्रेज पैदा होगे जिन्हें अपने ही देश और समाज से नफरत होगी ..उदहारण आज देश लिया मैंने आपके रूप में ..की काले अंग्रेज पैदा भी हो गये और पैदा करने लायक भी..
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