रविवार, 21 मार्च 2010

बाटला हाऊस एनकाऊंटर रिपोर्ट….a 2 million dollar question…..

बाटला हाऊस एनकाऊंटर मैं मारे गये दो आतंकवादियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से हमारा 6M मीडिया खूब चिल्ल पौं मचाये हुए हे कि और जिसका आधार उन्होने बनाया है कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट मैं ये लिखा हुआ हे कि उन शबों पर ब्लंट औब्जैक्ट से चोट के निशान भी पाये गये हैं…..और इस वजह से सब जोर शोर से इसे एक झूठा एन कांऊंटर बताने मैं लगे हुए हं

यहां कुछ चीजें जो हमारे भी जैहन मैं आई ये ये रिपोर्ट मैं देखकर जो कि हमारे एक मित्र ने यहां छापी है…..कुछ चीजें है जो थोङा सोचने पर आप को मजबूर करेंगी ……..

क्या किसी भी एनकाऊंटर का मीनू फिक्स होता है क्या कि इतनी गोलियां चलानी है….किस किस हथियार से चलानी है…..बंदूक के बट की मारनी है या नहीं….कुल मिलाकर जिस रिपोर्ट को पढकर ऐसी राय जिस किसी ने भी बनाई है….. उसमें कहीं भी ये साबित नहीं होता है कि वो एक फैक एनकाऊंटर था…..ये एक सामान्य सी बात है कि जब कोई हथियार बंद व्यक्ति से पुलिस की मुठभेङ हो रही है तो कोई भी पुलिस वाला अपना कम से कम नुकसान होते हुए सामने वाले को अधिक से अधिक नुकसान हो ऐसा प्रयास करता है….हां उसमें सामान्य तौर पर ये प्रयास जरूर किया जायेगा कि सामने वाले को भी जिंदा पकङा जाये….….सीधी सी बात है कि सुरक्षा बल उनसे अधिक से अधिक जानकारी हासिल करना चाहेंगे…और वे ये भी जानते हैं कि हमारे सैक्यूलर मित्र उनकी तरफ गिदध दृष् गङाये हुए हैं कि ऐसी किसी मुठभेङ मैं कोई गलती हो और हम उनको कठघरे मैं खङे करें……उन आतंकवादियों का पता नहीं पर जो पुलिस अधिकारी वहां कर्तव्य पालन करते हुए शहीद हुआ वो अनेक बार इस तरह की घटनाओं  को  सफलता पूर्वक झेल चुका था….

हमें ये नहीं भूलना चाहिये कि बाटला हाऊस की इस मुठभेढ मैं एक जांबाज पुलिस अधिकारी शहीद हुआ….उन दो मासूम छात्रों ने पुलिस को देखकर एक प्रशिक्षित व्यक्ति कि तरह     अंधाधुंध फायरिंग की वो फायरिंग किसी कलम से नहीं निकल रही थी बल्कि उनके पास आधुनिक हधियार थे……अब तो जामिया मिलिया वाले बतांयेंगे कि वो ऐसी क्या पढाई करवा रहे थे कि उनको इन हथियारों की दरकार पङी….और उनको ये नफासत भरा प्रशिक्षण कहां से मिला…और जहां दनादन गोलियां चल रही हों वहां ये कौन निश्चित करेगा कि हमें कितनी और कब गोलियां चलानी हैं……जयपुर मैं हुए बम विस्फोट का जो हाल ही मैं जो आरोपी पकङा गया है उसने भी स्वीकार  किया है कि वो भी  बाटला हाऊस  मैं ही रुका था……जो ये साबित करता है कि बाटला हाऊस मैं आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह औऱ हर तरह की सहायता मिलती थी…..

कुल मिलाकर इस रिपोर्ट मैं ऐसा कुछ भी नहीं कि इसके लिए इन लोगों को इतना खुश होने की जरूरत हो…..हां इतना जरूर है कि इस तरह चिल्लाने    से कुछ लोग जरूर औऱ गुमराह होंगे……                मार्क्स मुल्ला और माईनो से दबा हुये हमारे शर्म निरपेक्ष मीडिया ने एक शहीदकी शहादत पर कीचङ जो उछाला है वो इनकी नालायकी का गंदा नमुना है……

पर फिर भी ये यक्ष प्रश्न अभी बी वहां खङा हुआ है…….कि वे दो भोले भाले निरीह छात्र बंदुकों के साथ बाटला हाऊस मैं क्या अक्कङ –बक्कङ खेल रहे  थे…….हो सकता है अगली बार ये शगुफा भी छोङा जाये कि इंस्पेक्टर शर्मा हार्ट अटैक से मरे जो उनको गोलियों की आवाज सुनने से हो गया था……या के उनके खुद के साथियों ने उनको गोली मार दी…… क्यों कि हमारा शर्म निरपेक्ष मीडिया कुछ भी उङा सकता है….

17 comments:

  1. बहुत अच्छी बात कही आम जन को गम राह होने से बचना चहिये
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084
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  2. मैं तो एक ही बात जानता हूँ, अगर आपके पास बिना लाइसेन्स की बन्दुक या इस तरह के अन्य हथियार है तो सीधी सी बात है आप सामान्य व्यक्ति नहीं हो बल्कि आतंकवादी हीं हो. इस एनकाउंटर में गोली दोनों तरफ से चली थी यानि उस घर के अंदर कोई भजन नहीं कर रहा था जिसे पुलिस ने मार डाला. ऊपर से अगर आप पुलिस या किसी भी ड्यूटी वाले पर गोली चलाते हो तो शक की कही कोई गुंजाईश नहीं रहती.
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  3. संजरपुर, आजमगढ़ में किसी समय इनकी मजारें बनेंगी और उस पर हमारे ही हिन्दू चादर चढ़ा रहे होंगे.
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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
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  5. इनकी समझ में नहीं आयेगा यह सब ! ये तो आजकल खुले आम यह भी कहने लगे है कि अजमल कसाब को भारतीय पुलिस ने नेपाल से उठाकर मुंबई लाये थे, और वह निर्दोष है ! ये नया बयान देने की बिद्या उस कसाब को इनके वकील भाई ने सिखाई ! मुख में भले ही ये दिखावे के लिए देश प्रेम का राग अलापते हों लिकिन क्या कभी इन्होने खुलकर आतंक की निंदा की ?
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  6. aapne report ko nahi dekha hai shayad
    ye Murder tha aur Ins. Sharma ko bhi maara gaya hai ye baat kaafi pahle se kahi jaa rahi hai..ab report me bhi yahi aaya hai...
    agar aap Musalmaan matlab aatankwadi samajhte hain to baat alag hai
    magar agar aap mudde ko samajhna chahte hain to alag
    aur haan agar aap hBharat ke musalmano ko gaddar samajhte hain to ye aapki problem hai...aap samajhiye Loktantr iski ijazat deta hai
    NAfarat ki baat karni hai to aapme aur Bombers me mai koi farak nahi samajhta
    magar aap chizon ko samajh kar uska niwaran karne ke ikshuk hai to ye achchhi baat hai desh ko aise logon ki bahut zarurat hai
    aap musalmano ko Bharat se baahar nika phekna chahte hain to tay maaniye aap desh ke tukde karne ki soch rahe hain
    Desh lakiron me nahi insaanon me basta hai
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  7. और मिहिर भाई
    आपका स्लोगन "तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें" देख कर ताज्जुब हुआ माएं कभी अपने बच्चों की मौत नहीं चाहती मित्रवर और जो संतान दूसरी संतान की दुश्मन हो वो माँ को सुख दे रहा है या दुःख
    वैसे एक कविता सुनिए------

    पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूंखार
    गोली खाकर एक मर गया,बाकी रह गये चार

    चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन
    देश-निकाला मिला एक को, बाकी रह गये तीन

    तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गये वो
    अलग हो गया उधर एक, अब बाकी बच गये दो

    दो बेटे भारतमाता के, छोड़ पुरानी टेक
    चिपक गया है एक गद्दी से, बाकी बच गया एक

    एक पूत भारतमाता का, कन्धे पर है झन्डा
    पुलिस पकड कर जेल ले गई, बाकी बच गया अंडा

    (मेरा उद्देश्य आपकी भावनाओं को ठेस पहुचना नहीं है आशा है आप क्षमा करेंगे! मै महज़ अपना पक्ष रख रहा हूँ आशा है आप मुझे इसका अधिकार देंगे)
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  8. शफीक भाई मेरी बात से आपकी भावनाओं को ठेस पहुंची मैं इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं......मेरा ये लेख किसी भी तरह से मुसलमानों को आतंकवादी घोषित नहीं करता है.....मुसलमानों को मैं मेरी ही तरह देश भक्त नागरिक समझता हूं....पर जो रिपोर्ट (जिसका मैंने ऊपर हवाला दिया है)किसी भी कोण से ये साबित नहीं करती है कि ये मुठभेङ थी या हत्या की कार्यवाही....और इंस्पेक्टर शर्मा को मारने वाला ट्विस्ट तो समझ से बाहर है.....खैर मैं कोई जासूस नहीं .....मेरा उद्दश्य पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर जो भ्रांति फैलाई जा रही है सिर्फ उस पर तर्क करना है.....और उस पर मैं आप चाहें तो तर्क करने को तैयार हूं.आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता....न हिंदु न मुसलमान...ये देशद्रोही होते हैं जो देश के अमन चैन को नुकसान पहुंचा रहै हैं.....इनका किसी भी प्रकार का बचाव नाकाबिले बर्दाश्त है...आशा है आप मेरा मंतव्य समझेंगे
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  9. मिहिर जी, वैसे तो मैं भी जानता हूँ कि इनके साथ बहस करना मतलब वक्त की बर्बादी है लेकिन सीधा सा एक सवाल पूछिए कि मान लेते है जो ये लोग कह रहे है वह सत्य है तो क्या अगर उस वक्त और इस वक्त दिल्ली और केंद्र में बीजेपी की सरकार होती तो क्या ये लोग ऐसे ही सभ्य विरोध दर्ज करवाते, जैसा ये लोग अभी कर रहे है ?
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  10. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि मारे गए आरोपी आतिफ को काफी करीब से 10 गोलियां मारी गईं। ये गोलियां उसकी पीठ पर कंधे के नीचे के हिस्से में लगी थीं। रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि एनकाउंटर में मारे गए एक और आरोपी मोहम्मद साजिद को ऊपर से गोलियां मारी गईं थीं। उसके सिर के ऊपरी भाग में 3 गोलियां लगी थीं। साथ ही उसकी बॉडी पर किसी तेज धारदार हथियार के जख्म भी पाए गए हैं।

    तो आपके अनुसार आतिफ ने अपनी पीठ पुलिस को दिखा कर कहा होगा कि अब गोली चलाओ, वहीँ दुसरे आरोपी साजिद ने अपना सर झुका कर पुलिस को बोला होगा कि अब ठीक है, अब आराम से गोलियां चलाओ ताकि सही जगह गोली लगे और आराम से मृत्यु हो."
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  11. मित्रों अपने चेहरे पर से क्षत्रुता का चश्मा हटाओगे तो शायद हकीकत समझ में आजाए. मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि पुलिस गलत है, लेकिन पुलिस हमेशा सही होती हो, ऐसा भी नहीं है. और अगर कुछ गलत नहीं हुआ होता तो फिर जाँच के नाम से थर्राने क्यों लगते हैं सब? क्या जाँच की मांग पहली बार की जा रही है? क्या अब से पहले किसी पुलिस मुठभेड़ की जाँच नहीं हुई है?
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  12. तो आपके अनुसार आतिफ ने अपनी पीठ पुलिस को दिखा कर कहा होगा कि अब गोली चलाओ, वहीँ दुसरे आरोपी साजिद ने अपना सर झुका कर पुलिस को बोला होगा कि अब ठीक है, अब आराम से गोलियां चलाओ ताकि सही जगह गोली लगे और आराम से मृत्यु हो."

    सहनवाज जी , क्या आप उस वक्त एनकाउन्टर साइड पर मौजूद थे , यदि नहीं तो आपको कैसे मालूम कि पुलिस के जवानो की पोजिश्निग क्या थी ? मौत का ख़तरा सर पर देख जब आतंकी भागेगा तो पीठ पर ही गोली लगेगी न, और जब तीसरी मंजिल से आतंकी नीचे को भागेगा या फिर गोली शरीर के किसी और अंग पर लगने के बाद बेहोश होकर गिरते हुए( आगे की तरफ झुककर गिरना ) सामने से आती गोलियों की बौछार ये इन्तजार करेगी कि आतंकी के किस हिस्से में लगना है ?
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  13. "मित्रों अपने चेहरे पर से क्षत्रुता का चश्मा हटाओगे"

    चश्मे खुद के गलत नाप के पहने है उन्हें चेक करवाइए !
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  14. गोदियाल जी मैं वहां मौजूद नहीं था तो क्या हुआ, मैंने वह फोटोग्राफ और रिपोर्ट अवश्य ही पढ़ी है. स्वयं डॉक्टर ने संदेह व्यक्त किया है... जिसमे साफ दिखाया गया है की गोली सर के ऊपर से लगी थी, तो क्या आपके अनुसार पुलिस ऊपर पंखे पर चढ़ कर गोली चला रही थी? और दूसरी बात यह की गोली 1 अथवा 2 मीटर की दुरी से चलाई गई थी. क्या मुठभेड़ इतनी करीब से हो सकती है?

    आपको शायद ज्ञात हो की जिनको गोली लगी वह कमरे के अन्दर और पुलिस बाहर की तरफ थी, इसलिए भागने की तो बात ही बेमानी है.

    सारी बात छोडिये.... इनता संदेह होने के बाद भी जाँच में परेशानी है?
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  15. शाह नवाज साहब....जयपुर मैं हुए बम विस्फोट का जो हाल ही मैं जो आरोपी पकङा गया है उसने भी स्वीकार किया है कि वो भी बाटला हाऊस मैं ही रुका था……जो ये साबित करता है कि बाटला हाऊस मैं आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह औऱ हर तरह की सहायता मिलती थी…..ये बाटला हाऊस क्या जयपुर दिल्ली हाईवे पर है क्या कि सारे आतंकवादी वहीं रूकते थे...
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  16. @पी.सी.गोदिया ji

    aap sahi hain aap hamse baat nahi karna chahte yahi ek samasya hai samajh lijiye chashma kisko chahiye....swal BJP aur congress ka nahi mitr sawal police ki manmaani aur sach chhupane ka hai....aam aadmiyon ko maarne ke bahane hain sarkaar ke paas aur in kaamon se wo ap ni naakaami chhupani chahti hai....aap rajnaitik soch rakhte hain to bakhubi parichit honge in chalon se....aur ek baat bata dun aapka tark mazbut ho jayega "is encounter ko desh ke home minister ne coordinate kiya tha :) nazar mila kar baat kijiye agar samasya se ladna hai to nahi to aap desh ki barbadi ke liye zimmewar samjhe jayenge.......aapse aapki baat hi duhrata hun मित्रों अपने चेहरे पर से क्षत्रुता का चश्मा हटाओगे" upar apne aur hamare comment padiye aur sochiye ki andhere me kaalaa chashma kisne pahna hai....



    @Mihir bhai
    aapka jawab sunkar achchha laga...mai batla house ke paas hi rahta hun...aapko shayad yaad ho ki Ins.Mohanchandr sharma ki hatya se do pahle hi Ins.Rajbeer ki hatya huyi thi wo bhi ek SSP ki pistol se (SSP Haryana ATS jo abhi haal me rangdari ke maamle me pakde gaye)aur Mohanchandr sharma ki hatya ke baad do Police officials sandigdh halat me maare gaye
    Ab mujhe wajah samajh nahi aati ki Delhi police ke suparcops is tarah lagatar maut ke shikar kyon ho rahe hain
    Dusri baat ki encounter me do taraf se gooliyan chalti hain aisi halat me bat ka istemal kaise ho sakta hai....rahi baat jaipur wale ki
    to do sambhavna hai ek ki byan plant kiya gaya ya dusra ki wo batla house me ruka
    dusri halat me bhi mai aapko batana chahunga ki batla house ek bahut bada area hai koi ek ghar nahi...batla house me musalmaanon ki badi aabadi hai to usme uske rukne ki sambhavna hai
    report ko aap dekhenge to saaaf hoga ki ye encounter farzi tha aur sidha murder tha....hamara swal hai ki is pure maamle ki imandaar janch ho jisme ye saaf ho ki aakhir Inspector ki maut kaise huyi kyoki ye to saaf hai ki un ladkon ko pakad kar maara gaya postmartem report to ye bhi kahti hai ki un ladkon ki maut alag alag time me huyi hai
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  17. मौत की टाइमिंग बिल्कुल अलग अलग हो सकती है. जिसके दिल में या मस्तिष्क में गोली लगेगी वह तुरन्त मर जायेगा और जिसके अन्य हिस्से में लगेगी वह देर से मरेगा. बाकी इन आतंकवादियों का साथी स्वीकार कर चुका है कि वह वहीं था और आजमी तथा एक अन्य विधायक से मदद मिली. कहानी खत्म.
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