रविवार, 10 जुलाई 2011

नित्य प्रेरणा -हमारी मातृभूमि

।।नित्यप्रेरणा ।।

एक दिन-एक पृष्ठ -एक विचार

श्री गुरूजी (श्री माधव सदाशिव राव गोलवलकर )के विचारों पर आधारित श्री गुरूजी समग्र के १२ खंडों का संक्षिप्त रूप।

 

१ जनवरी

यह है् हमारी पवित्र मातृभूमि भारत माता .जिसी महत्ता के गीत देवताओं ने इन शब्दों मै गाये हैं .image

 गायंति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारत भूमिभागे ।

स्वर्गापवर्गास्पदहेतुभूते भवन्ति भूयः पुरूषाः सुरत्वात्।।

(देवगण इस प्रकार गीत गाते हैं कि हम देवताओं से भी वे लोग धन्य हैं. जो स्वर्ग अपवर्ग के लिए साधनभूत् भारत भूमि में उत्पन्न हुए हैं।

  • यह भूमि ,जिसे महायोगी अरविंद ने विश्व की दिव्य जननी के रूप में जीवंत आविष्कीकरण कर प्रत्यक्ष किया जगन्माता ।आदिशक्ति । महामाया। महादुर्गेा । और जिसने मूर्तरूप साकार होकर उसके दर्शन पूजन का हमें अवसर प्रदान किया है।

  • भूमि , जिसकी स्तुति हमारे दार्शनिक कवि रविंद्रनाथ ठाकुर ने देवी भूवनमोहिनी नील सिंधु जल धौत चरण तल कहकर की है।

  • यह भूमि जिसका वंदन स्वतंत्रता के उद्घोषक कवि बंकिम चंद्र ने अपने अमर गीत वंदे मातरम् में किया है। जिसने सहस्त्रों युवा हृदयों को स्फूर्त कर स्वतंत्रता की प्राप्ति हेतु आनंदपूर्वक फांसी के तख्ते पर चढने की प्रेरणा दी-त्वं हि दुर्गा दशप्रहरण धारिणी।

  • यह भूमि । जिसकी पूजा हमारे सभी संत महात्माओं ने मातृभूमि ,धर्म भूमि , कर्म भूमि एवं पुण्य भूमि के रूप में की है। यह वास्तव मे देव-भूमि और मोक्ष भूमि है।

  • यह भूमि , जो अनंत काल से हमारी प्यारी पावन भारत माता है, जिसका नाम मात्र हमारे हृदयों को शुध्द सात्विक भक्ति की लहरों से आपूर्ण कर देता है।

  • यह भूमि जो अनंत काल से हमारी प्यारी भारत माता है, जिसका नाम मात्र हमारे हृदयों को शुद्ध ,सात्विक भक्ति की लहरों से आपूर्ण कर देता है।

  • अहो ,यही तो हमारी सबकी मां है, हमारी तेजस्विनी मातृभूमि ।

    वास्तव मे भारत नाम ही निर्देश करता है कि यह हमारी मां है। हमारी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार किसी महिला को पुकारने की सम्मान पूर्ण रीति यह है कि उसे उसके पुत्र के नाम से पुकारा जाये । किसी महिला को अमुक की पत्नी अथवा अमुक की मिसेज कहकर पुकारना पाश्चात्य रीति है। हम कहा करते हैं वह रामू की मां है। यही बात हमरी मातृभूमि भारत के नाम के विषय में भी यही लागू होती है । भरत हमारे ज्येष्ठ भ्राता हैं जिनका जन्म बहुत काल पूर्व हुआ था । वह उदार, श्रेष्ठ गुण संपन्न और विजयिष्णु राजा थे एवं हिंदु आदर्श के भासमान आदर्श थे । जब किसी स्त्री के एक से अधिक पुत्र होते हैं ,तब हम उसे उसकी ज्येष्ठ संतान के नाम से अथवा सबसे अधिक ख्याति प्राप्त संतान के नाम से पुकारते हैं । भरत ख्यातिप्राप्त थे, इसलिए यह भूमि उनकी माता कही गई? भारत ,अर्थात सभी हिंदुओं की माता ।

  • मेरी मातृभूमि मंदिर है। संतों ,ऋषियों,मुनियों वाली ।

    भारत भूमि मिहिर है। मेरी मातृभूमि मंदिर है

नित्य प्रेरणा

नित्य प्रेरणा  भारतीय विचार साधना ,पुणे द्वारा प्रकाशित श्री माधव सदाशिव राव गोलवलकर यथा श्री गुरूजी के ३६६ विचारों का संकलन है..पुस्तक श्री गुरूजी के लेखों ,पत्रों और बौद्धिकों में उनके द्वारा दिेये गये विचारों का संग्रह श्री गुरूजी समग्र जिसके कि १२ खंड है पर आधारित  है। इस प्रकार से लिखी गई है कि साल के प्रत्येक दिन के लिए गुरूजी द्वारा प्रदत्त एक विचार है  । नित्य प्रेरणा भारत और हिंदु समाज के धार्मिक,राजनैतिक,सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर उनके गहन चिंतन को दर्शाती है। मेरा प्रयास है कि इस चिट्ठे के माध्यम से आप तक ये पहुंचे.इसे प्रतिदिन तो नही पर साप्ताहिक रूप से मैं छापने का प्रयास करूंगा ।       .इसे प्रारंभ करने से पहले पाठकों से विनम्र निवेदन है कि निम्न विचार सूत्रों का अवश्य पढें जिनके सहारे इन विचारों का संकलन किया गया है....

  • अपनी मातृभूमि-भारत देश की विशेषता है कि यहां का हर नागरिक अपनी भूमि को मातृरूप मैं देखता है और स्वयं को पुत्र रूप मानता है.

  • गतवैभव ही आक्रमणों का कारण-भारत देश सभी क्षैत्रों मै सुसंपन्न था। इस कारण पश्चिम के अनेक देशों ने आक्रमण किये।परंतु हर आक्रमण कहमने विफल किया।किंतु गत कुछ वर्षों से हमाररे आपसी संघर्ष ,ईर्ष्या,द्वेष और स्पर्धा के कारण हमें पराजित होना पङा।पर्ंतु हमारा इतिहास वैभव शाली तथा संघर्ष का है,पराजय का नहीं।

  • आत्मविस्मृति के परिणाम-राष्ट्रभक्ति हीनता,आपस मै संघर्ष,असंघटन,छिन्नभिन्नता का मूलकारण हमारी आत्मविस्मृति है।

  • आत्म जागृति के उपाय-हर एक भारतीय का अंतःकरण राष्ट्रभक्ति से भरा हुआ,राष्ट्रचिंतन मयी,देश के लिए सर्वस्व न्यौंछावर करने वाला होना चाहिये और यह केवल नित्य के संस्कारों से ही संभव है।

  • शिक्षा का स्वरूप -शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति का संपूर्ण विकास।व्यक्ति का समाज से एकरूप होना जरूरी है।हर एक भारतीय निःस्वार्थी,त्यागी,सेवाभावी और सत्कार्यरत हो,ऐसी शिक्षा हमें सामाजिक शिक्षा प्रणाली से मिलनी चाहिये।

  • समाज रचना-पूरा हिंदु समाज एकरूप,एकात्म,सुसंघटित और समरस हो।

  • राष्ट्रीय चरित्र की निर्मिति-व्यक्तिगत चरित्र के साथ राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण भी आवश्यक है।

  • एकात्म शासन की आवश्यकता-हिंदुस्तान के सभी हिंदुओं में सांस्कृतिक एकता के निर्माण के लिए एकात्म शासन की आवश्यकता है.

  • परम वैभव की कल्पनाएं-हिंदु सभ्यता की बैभव की संकल्पना केवल आर्थिक उन्नति पर आधारित नहीं है।हिंदु संस्कृति चाहती है कि समाज चार पुरुषार्थों से (धर्म अर्थ काम,मोक्ष) सुसंपन्न हो ष।

  • राष्ट्रपुरुषों का योगदान-आदर्श राष्ट्रपुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेते हुये सभी भारतीयों ने अपना मन बुद्धिवर्तन सुसंस्कारित करना चाहिये।

  • जागतिक संदर्भ-हिंदु सभ्यता दुनिया के सभी क्षैत्रों में मार्गदर्शक है।किसी भी प्रकार की पिस्थइति मै व्यक्ति ,कुटुंब,व्यवसाय ,समाज और राष्ट्र की सभी समस्याओं का हल करने का सामर्थ्य हिंदु विचारधारा मैं ही है,

  • हिंदु संस्कृति का विश्वकल्याण कारी स्वरूप-हिंदु सभ्यता समस्त मानवजाति को परमात्मा का एक रूप मानती है।हर एक व्?क्ति उसी परमात्मा का सूक्ष्म अंश है। मानव समाज को परमसुख की प्राप्ति तब ही होगी जब समाज वसुधैव कुटुंबकम् का अनुभव करेगा और ज्ञानयुक्त,चरित्रवान,धर्म-नियंत्रित आपस में पूर्ण विश्वास और सहयोग संपन्नता से भरा होगा।

शुक्रवार, 26 नवम्बर 2010

० अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ठेकेदार...read -indian blogger silenced.#barkhagate...#mediamafia

26/11 के आतंकवादी हमले के बाद जिस तरह मीडिया ने रिपोर्टिंग की वो बेहद अफसोस जनक और शर्मनाक थी....मैने स्वयं ने उस दिन के बाद से आजतक इंडिया 24 चैनल और एन डी टी वी को देखना बंद कर रखा है....सहीमायने मैं उस रिपोर्टिंग से जैसे चैनल्स आतंकवादियों को सहायता पहुंचा रहे हों...हद तो तब हो गई जब किसी चैनल वाले ने उन आतंकवादियों मैं से किसी से संपर्क साध कर उनसे बातचीत करने की कोशिश की.और ब्रेकिंग न्यूज की तरह पेश करने की चेष्टा की.तो यूं लगा कि ये चैनल भी इस षड्यंत्र का हिस्सा तो नहीं.एन एस जी के तत्कालीन चीफ जनरल गुप्ता ने आज के भास्कर मैं इस बात की स्वीकारोकति की है कि इन चैनल्स की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पङा..और तब मैने इंडिया 24 को जीवन भर न देखने की सौगंध खाई जो आज भी मैं पालन कर रहा हूं.और जिस दिन गलती से देख लिया तो दूसरे दिन एक समय का व्रत रखकर प्रायश्चित्त करता हूं..
चैतन्य कुंटे नामक एक ब्लोगर ने जो कि नीदरलैंड मैं रहता है ने 27 नवंबर 2011 को एक ब्लोग पोस्ट छापी जिसमें उसने और विशेषकर NDTV और उसकी तुर्रम खां पत्रकारा बरखा दत्त के बारे मैं लिखा कि किस तरह तरह से उनकी रिपोर्टिंग की वजह से सेना को न केवल 26 /11  की घटना के समय  बल्कि कारगिल युद्द के समय भी नुकसान उठाना पङा.उनवकी रिपोर्टिंग की वजह से दुशमन को हमारी लोकेशने के बारे मैं सूचनाएं मिली और हमें नुकसान हुआ.
redistribution के अनुसार बरखा दत्त ने 3 जनवरी को अपने फैस बुक पर लिखा

you may want to know that the author of this email- a certain Mr. Kunte who lives in Holland.. has been sent a legal notice by NDTV for the rubbish and lies peddled in this email.
इसके बाद बरखा जी फैस बुक पर ही फिर लिखती है

Just because some random bloke can sit at a computer and make up stuff doesnt mean he or others like him need to be dignified with responding to their utter and total rubbish. rubbish is what it is. And as already mentioned. Mr. Kunte has been served a legal notice for libel by NDTV.
That should give you some indication of where we and I stand. The freedom afforded by the Interent cannot be used to fling allegations at individuals or groups in the hope that they will then respond to things that arent worthy of engagement.

कुल मिलाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इन ठेकेदारों ने एक ब्लोगर की इन गलीज लोगों की कारगुजारियों के खिलाफ लिखने की  सजा उसे एक लंबा चौङा कानूनी नोटिस भेजकर और लंबे चौङे मुआवजे की धमकी देकर उसे माफी मांगने को मजबूर कर दिया..
ये सारा घटना क्रम ग्लोबल वोईस ओनलाईन फोरम नामक एक ब्लोगर फोरम द्वारा यहां छापा गया है.....कुल मिलाकर ये मीडिया जिसे हम लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहते हैं वो न केवल मनमानी करता है बल्कि माफिया की तरह धमका कर अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को कुचलने की हरकतें भी करता ह

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ठेकेदार...read -indian blogger silenced.#barkhagate...#mediamafia

26/11 के आतंकवादी हमले के बाद जिस तरह मीडिया ने रिपोर्टिंग की वो बेहद अफसोस जनक और शर्मनाक थी....मैने स्वयं ने उस दिन के बाद से आजतक इंडिया 24 चैनल और एन डी टी वी को देखना बंद कर रखा है....सहीमायने मैं उस रिपोर्टिंग से जैसे चैनल्स आतंकवादियों को सहायता पहुंचा रहे हों...हद तो तब हो गई जब किसी चैनल वाले ने उन आतंकवादियों मैं से किसी से संपर्क साध कर उनसे बातचीत करने की कोशिश की.और ब्रेकिंग न्यूज की तरह पेश करने की चेष्टा की.तो यूं लगा कि ये चैनल भी इस षड्यंत्र का हिस्सा तो नहीं.एन एस जी के तत्कालीन चीफ जनरल गुप्ता ने आज के भास्कर मैं इस बात की स्वीकारोकति की है कि इन चैनल्स की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पङा..और तब मैने इंडिया 24 को जीवन भर न देखने की सौगंध खाई जो आज भी मैं पालन कर रहा हूं.और जिस दिन गलती से देख लिया तो दूसरे दिन एक समय का व्रत रखकर प्रायश्चित्त करता हूं..
चैतन्य कुंटे नामक एक ब्लोगर ने जो कि नीदरलैंड मैं रहता है ने 27 नवंबर 2011 को एक ब्लोग पोस्ट छापी जिसमें उसने और विशेषकर NDTV और उसकी तुर्रम खां पत्रकारा बरखा दत्त के बारे मैं लिखा कि किस तरह तरह से उनकी रिपोर्टिंग की वजह से सेना को न केवल 26 /11  की घटना के समय  बल्कि कारगिल युद्द के समय भी नुकसान उठाना पङा.उनवकी रिपोर्टिंग की वजह से दुशमन को हमारी लोकेशने के बारे मैं सूचनाएं मिली और हमें नुकसान हुआ.
redistribution के अनुसार बरखा दत्त ने 3 जनवरी को अपने फैस बुक पर लिखा
you may want to know that the author of this email- a certain Mr. Kunte
who lives in Holland.. has been sent a legal notice by NDTV for the
rubbish and lies peddled in this email.
इसके बाद बरखा जी फैस बुक पर ही फिर लिखती है

Just because some random bloke can sit at a computer and make up stuff
doesnt mean he or others like him need to be dignified with responding
to their utter and total rubbish. rubbish is what it is. And as already
mentioned. Mr. Kunte has been served a legal notice for libel by NDTV.
That should give you some indication of where we and I stand. The
freedom afforded by the Interent cannot be used to fling allegations at
individuals or groups in the hope that they will then respond to things
that arent worthy of engagement.



कुल मिलाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इन ठेकेदारों ने एक ब्लोगर की इन गलीज लोगों की कारगुजारियों के खिलाफ लिखने की  सजा उसे एक लंबा चौङा कानूनी नोटिस भेजकर और लंबे चौङे मुआवजे की धमकी देकर उसे माफी मांगने को मजबूर कर दिया..
ये सारा घटना क्रम ग्लोबल वोइस ओनलाईन नामक एक ब्लोगर फोरम द्वारा यहां छापा गया है.....
कुल मिलाकर ये मीडिया जिसे हम लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहते हैं वो न केवल मनमानी करता है बल्कि माफिया की तरह धमका कर अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को कुचलने की हरकतें भी करता हैं....

बुधवार, 17 नवम्बर 2010

कांग्रेस का फासीवाद.......

कुछ दिन पूर्व सीकर मैं एक गोपीनाथ गौशाला  मैं गोपाष्टमी के कार्यक्रम मैं कैंद्रीय सङकर मंत्री महादेव सिंह खंडेला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे.चूंकि गौशाला एक सार्वजनिक संस्था है तो वहां मंच पर उपस्थित लोगों मैं भाजपा और संघ से जुङे कुछ अन्य लोग भी बैंठे हुए थे.इस बात पर मंत्री महोदय की शिकायत आला कमान पर पहुंचा दी गई कि वे संघ और भाजपा वालों से मैलजोल बढा रहे हैं....इसी तरह सीकर के युवा पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के प्रयासों से गांधी जयंती पर दौङेगा सीकर के नाम से एक मेराथन का आयोजन किया गया.जिसमें लायंस ,रोटरी,भारत विकास परिषद,महावीर इंटरनेशनल आदि अन्यान्य सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया गया..करीब 15 हजार लोगों ने इस दौङ में भाग लिया और सभी लोगों ने दलगत विचार धारा से ऊपर उठकर इस नशामुक्ति और एकता के संदेश वाले कार्यक्रम मैं भाग लिया .... कार्यक्रम के समापन पर राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेसी विधायक राजेंद्र पारीक ,स्थानीय कांग्रेसी चैयरमैन सलमा शेख और अन्यान्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाङी  मौजूद थे.मंच पर मौजूद सामाजिक संगठनों के लोगों मैं कुछ संघ से जूङे लोग भी थे.इस प्रेरणादायी कार्यक्रम के लिए पुलिस विभाग को और एस पी साहब की प्रशंसा कि जानी चाहिये थी..चूंकि ये किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं था इसलिए जिले के अन्य विधायकों को और सांसद को नहीं बुलाया गया...परिणाम पुलिस अधीक्षक महोदय की जबर्दस्त खिंचाई...ट्रांसफर के प्रयास और संघ से गठजोङ का आरोप.....
आज के दैनिक भास्कर की खबर....यहां देखे                  
बेगूं के विधायक राजैंद्र विधूङी ने पंचायती राज्य मंत्री श्री भरत सिंह पर संघ के लोगों से संपर्क रखने का आरोप लगाया है...
संघ क्या भूत है...और ये विधायक और मंत्री क्या बच्चे हैं पर आश्चर्य तो ये है कि कांग्रेसियों को  भूत के डर की तरह संघ से संपर्क मैं आने का डर दिखाया जाता है.इसका मतलब मेरे समझ मैं या तो संघ की विचारधारा इतनी सशक्त है कि संपर्क मैं आने मात्र मे ये किसी भी समझदार आदमी को प्रभावित कर सकती है.../या कांग्रेस की अपनी विचार धारा इतनी कमजोर है कि वह किसी भले आदमी के संपर्क मैं आने मात्र से धुल जाती है. मैं संघ से जुङा रहा  हूं और मेरे कांग्रेसी,साम्यवादी,बहुजन वादी ,मुसलमान,हिंदु अमीर गरीब,अगङे,पिछङे,हरिजन सब प्रकार के मित्र हैं ...मुझे न किसी ने डराया न किसी समझाया बल्कि यही सिखाया गया कि समाज मैं किसी भी भेद को छोङते समाज के भले लोगों से हमारी मित्रता होनी चाहिये...
क्या फासिज्म यही होता है कि विचार धारा के आधार पर मित्रता या संपर्क हों....इस तरह की बातें कांग्रेस को किस और धकेल रही हैं पता नहीं पर एक लोकतंत्र के लिए तो निश्चित रूप से ठीक नहीं हैं.....

बृहस्पतिवार, 4 नवम्बर 2010

सिंधु श्रोत से हिंदु सिंधु तक …………

सिंध श्रोत से हिंदु सिंधु तक रहते आये रहते हैंimage

इस धरती को मां कहते जो हिंदु उनको कहते हैं।

हिंदु उनको कहते हैं हम हिंदु उन्हें ही कहते हैं।।

संप्रदाय हों चाहे जो भी,पूजा का कुछ ढंग रहे

प्रांत जाति का प्रश्न नहीं,कुछ काला गोरा रंग रहे

सब समाज अपनापन हो ,सुख दुख मैं नित संग रहे।

राष्ट्र देह परिपुष्ट बनाने,जुटे सदा जो अंग रहे

मिलकर बढते चरम शिखर तक मिलकर संकट सहते हैं….1

इस धरती को…………………………….

एक हमारा रक्त,रक्त मै,एक भारती धारा है

एक हमारा शील,शील मै,एक भरी मर्यादा है

आजादी है बसी प्राण मै,प्राण योग से बांधा है

भौतिकता के मस्त गजों को ,संयम द्वारा साधा है

मानवता के अडिग उपासक ,दानवता को दहते हैं …..2

इस धरती को ………………..

आज संघ फिर जुटा यत्न मै,हिंदु भाग्य जगाने को

सदियों से संचित कष्टों को जङ से खोद मिटाने को

खुला निमंत्रण सभी सुतों को,मां की लाज बचाने को

आत्म ज्ञान जो करता जाये,रोक नहीं है आने को 

भारत मां में निष्ठा जिनकी हाथ सभी का गहते हैं….3

इस धरती को……….